मध्य प्रदेश के बालाघाट में स्वास्थ्य तंत्र की विफलता के कारण हुई बच्चों की मौतों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. अलग-अलग राजनीतिक धारा से ताल्लुक रखने वाले दो चेहरे- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और डिजिटल एक्टिविज्म से उभरे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के चीफ अभिजीत दीपके इस मुद्दे पर एक ही सुर में बोलते नजर आ रहे हैं.
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बालाघाट का लाल-मिट्टी इलाका और स्वास्थ्य आपातकाल
बालाघाट के बेहर और बिरसा ब्लॉक के दूरदराज के गांवों में पिछले 90 दिनों में 30 से अधिक मासूमों की जान चली गई. समय पर टीकाकरण न होना, पीने का साफ पानी न मिलना और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी इस त्रासदी के मुख्य कारण बताए जा रहे हैं.
जमीनी पड़ताल और राजनीतिक कटाक्ष
अभिजीत दीपके ने ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट करते हुए दिखाया कि कैसे कई गांवों में पीड़ित परिवारों की सुध लेने न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा और न ही डॉक्टर उपलब्ध थे. इसके बाद अपने अनोखा पॉलिटिकल सटायर पेश करते हुए उन्होंने खुद को 'काल्पनिक सीएम' मानकर इस्तीफे का पत्र जारी किया, जिससे राज्य सरकार पर नैतिक दबाव बनाया जा सके.
वही दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने भी इंदौर दौरे से पहले दिए बयान और पोस्ट के जरिए राज्य सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में आदिवासी, गरीब और दलित वर्ग लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं.
अलग शैलियां, लेकिन कोर मुद्दों पर सहमति
यद्यपि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर की मुख्यधारा की राजनीति करते हैं और अभिजीत दीपके सोशल मीडिया-आधारित एक्टिविज्म के जरिए राजनीति में उभरे हैं, फिर भी बेरोजगारी, पेपर लीक, आदिवासियों की दुर्दशा और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे मुद्दों पर दोनों की आवाज एक समान सुनाई दे रही है.
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