मध्य प्रदेश के बैतूल (Betul) से एक हैरान करने वाली और चर्चा का विषय बनी खबर सामने आई है. यहां एक बेटी ने कड़ी मेहनत कर जज की परीक्षा पास की, अपने माता-पिता का सपना भी पूरा किया लेकिन जॉइनिंग से पहले ही एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया. प्रखर श्री दीदी ने जज की नौकरी को ठुकराकर संयम और वैराग्य का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया है.
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माता-पिता का सपना किया पूरा
प्रखर श्री दीदी के मुताबिक, उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा पास करें. उन्होंने परीक्षा क्वालीफाई कर उनके इस सपने को तो पूरा किया, लेकिन उनके मन में बचपन से ही वैराग्य की भावना थी. उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की सेवा एक सीमित दायरे में ही कर पातीं, जबकि भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर वह पूरी दुनिया को अहिंसा का संदेश दे सकती हैं.
भव्य तरीके से दी गई विदाई, निकली बिनोली
प्रखर श्री दीदी के परिवार ने उनकी दीक्षा से पहले एक भव्य विदाई समारोह (बिनोली) का आयोजन किया. इस दौरान बैतूल में गाजे-बाजे, विंटेज कार और उदयपुर के प्रसिद्ध बैंड के साथ भव्य जुलूस निकाला गया. परिवार और जैन समाज के लोगों ने मिलकर अपनी बेटी को अनोखे अंदाज में विदाई दी.
22 नवंबर को होगी दीक्षा
श्री दीदी आगामी 22 नवंबर 2026 को सोनागिर जी सिद्ध क्षेत्र में गणी आरिका विष श्री माता जी के सानिध्य में जैनेश्वरी दीक्षा लेंगी. दीक्षा के बाद वह हमेशा के लिए श्वेत वस्त्र धारण कर लेंगी और इसके बाद वह कभी भी रंगीन कपड़ों में नजर नहीं आएंगी. इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और चर्चा का माहौल है.
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