बैतूल में मदरसा होने के शक में तोड़ा गया स्कूल? 22 लाख की बिल्डिंग पर चला बुलडोजर, जानें क्या है पूरा सच

Betul madrasa controversy: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मदरसा होने के शक में एक निर्माणाधीन स्कूल पर बुलडोजर चलने का मामला सामने आया है. ₹22 लाख की लागत से बन रही इमारत को लेकर प्रशासन और भवन मालिक के दावों में बड़ा विरोधाभास है. क्या यह धार्मिक अफवाह का नतीजा था या अवैध निर्माण पर कानूनी कार्रवाई? जानिए बैतूल स्कूल विवाद की पूरी सच्चाई.

Betul school demolition news
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राजेश भाटिया

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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां ढाबा गांव में अब्दुल नईम नामक व्यक्ति द्वारा बनवाए जा रहे एक निर्माणाधीन स्कूल के हिस्से को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया. आरोप लग रहे हैं कि यह कार्रवाई इस अफवाह के बाद की गई कि यहां अवैध रूप से मदरसा चलाया जाने वाला है. हालांकि, प्रशासन इसे अवैध निर्माण बता रहा है.

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क्या है पूरा विवाद?

अब्दुल नईम अपनी निजी जमीन पर लगभग ₹22 लाख की लागत से एक स्कूल भवन का निर्माण करा रहे थे. नईम का कहना है कि उन्होंने 30 दिसंबर को एमपी बोर्ड (MP Board) में स्कूल की मान्यता के लिए आवेदन भी किया था. लेकिन अचानक गांव में यह अफवाह फैल गई कि यहां मदरसा खोला जा रहा है. नईम ने सफाई देते हुए कहा, "गांव में हमारे समाज के सिर्फ तीन घर हैं, ऐसे में मदरसा खोलकर मैं किसे पढ़ाऊंगा? मेरा इरादा सिर्फ एक स्कूल खोलने का था ताकि इलाके के बच्चों को महाराष्ट्र न जाना पड़े."

प्रशासन की दलील: 'मदरसा नहीं, निर्माण अवैध'

इस पूरे मामले पर बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी धार्मिक या शिक्षण संस्थान के खिलाफ नहीं थी. कलेक्टर के मुताबिक, यह निर्माण पूरी तरह अवैध था और ग्राम पंचायत ने पंचायत राज अधिनियम के तहत पहले ही तीन नोटिस जारी किए थे. कलेक्टर ने कहा, "यह भवन नियमों का पालन नहीं कर रहा था, इसलिए पंचायत के आदेश पर इसके एक हिस्से को हटाया गया। मदरसा या स्कूल का मुद्दा बाद में खड़ा किया गया है." 

भवन मालिक की गुहार: "जुर्माना भरने को तैयार, पर तोड़ो मत"

अब्दुल नईम और उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया. नईम ने कहा कि अगर कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो वह जुर्माना भरने को तैयार हैं, लेकिन मेहनत की कमाई से खड़े किए गए भवन को तोड़ना गलत है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑनलाइन आवेदन के दौरान पंचायत की एनओसी (NOC) का कहीं जिक्र नहीं था, इसलिए उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी.

इलाके में तनाव और चर्चा

महाराष्ट्र की सीमा से सटे इस इलाके में स्कूल टूटने की घटना ने तूल पकड़ लिया है. स्थानीय लोगों का मानना है कि स्कूल बनने से बच्चों को शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ता. फिलहाल, प्रशासन ने इसे केवल अवैध निर्माण पर की गई कानूनी कार्रवाई करार दिया है.

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