राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में वकील और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी तूल पकड़ चुका है. खटलापुरा मंदिर के पास रास्ते और पेट्रोल पंप की जानकारी मांगने से शुरू हुई कहासुनी थाने में मारपीट तक पहुंच गई, जिसके बाद शहर की कानून व्यवस्था और पुलिस-अधिवक्ता संबंधों पर सवाल खड़े हो गए हैं.
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पेट्रोल पंप पूछने पर बढ़ा विवाद
पीड़ित वकील राकेश रावल के मुताबिक, मंगलवार को खटलापुरा मंदिर के पास उनकी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो रहा था. जब उन्होंने वहां तैनात पुलिसकर्मियों से पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा तो बहस शुरू हो गई. वकील का आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें जबरन जहांगीराबाद थाने ले आए और परिसर में पार्किंग के पास जब वह बाथरूम कर रहे थे, तब पीछे से लाठी-डंडों से उन पर हमला कर दिया गया.
8 घंटे तक वकीलों का चक्काजाम
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में वकील जहांगीराबाद थाने पहुंचे और दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करने लगे. बुधवार को वकीलों ने कोर्ट के बाहर सड़क पर करीब 8 घंटे तक चक्काजाम कर प्रदर्शन किया. बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दो आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया. हालांकि, प्रदर्शनकारी वकील एफआईआर की मांग पर अड़े रहे. आखिरकार रात 10:30 बजे पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद ही प्रदर्शन समाप्त हुआ.
पुलिस का पलटवार: दोनों पक्षों पर क्रॉस FIR
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वकील राकेश रावल के खिलाफ भी शासकीय कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है.
निलंबित थाना प्रभारी का वीडियो बयान
इसी बीच निलंबित थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार का एक वीडियो बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि "सत्य हमेशा सूर्य के समान होता है, बादल कितने भी घने हों एक दिन जरूर छंटेंगे". इसके साथ ही उन्होंने एक महिला पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह वरिष्ठ स्तर पर गलत जानकारियां (मिसगाइड) देती हैं और निचले पुलिसकर्मियों का मानसिक उत्पीड़न करती हैं. उन्होंने मांग की है कि जांच की प्रक्रिया से उस महिला अधिकारी को दूर रखा जाए.
पुलिस कमिश्नर का बयान
निलंबित थाना प्रभारी के आरोपों पर भोपाल पुलिस कमिश्नर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर जांच अधिकारी को लेकर किसी पुलिसकर्मी को आपत्ति है तो नियमानुसार जांच अधिकारी को बदला जा सकता है. फिलहाल दोनों तरफ से केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
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