भोपाल में देर रात मेट्रो निर्माण कार्य को लेकर भारी हंगामा हो गया. भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान परिसर में मेट्रो का काम शुरू कराने पहुंची टीम और पुलिस बल को विरोध का सामना करना पड़ा. खबर मिलते ही भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंच गए और अधिकारियों पर जमकर बरसे. विधायक का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने पुलिस और मेट्रो अफसरों को सख्त लहजे में वहां से जाने को कह दिया.
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देर रात भारी मशीनों के साथ पहुंची थी मेट्रो टीम मिली जानकारी के अनुसार, देर रात मेट्रो की टीम बैरिकेडिंग और मशीनों के साथ शाही कब्रिस्तान के पास पहुंची और काम से जुड़ी तैयारियां शुरू कीं. बताया जा रहा है कि विधायक आतिफ अकील मेट्रो के ऑरेंज लाइन के अंडरग्राउंड रूट को लेकर पहले से ही नाराज चल रहे थे. कब्रिस्तान के पास काम शुरू होने की भनक लगते ही वे तुरंत समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब शुरू कर दिए.
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तीखी हो गई. मौके पर विधायक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी. विधायक ने सवाल उठाया कि
चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा. क्या शाही औकाफ से अनुमति ली गई?
विधायक आतिफ अकील ने साफ कहा कि कब्रिस्तान की जमीन पर बिना पूर्व अनुमति के मेट्रो का काम किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल दागे क्या काम शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों या स्थानीय प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी गई थी?
क्या 'शाही औकाफ' से इसके लिए कोई लिखित अनुमति ली गई है?
विधायक का आरोप है कि शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी पर बिना वैधानिक अनुमति के काम शुरू किया गया है, जो पूरी तरह से गलत है. उन्होंने अफसरों से कहा कि पहले सभी वैध दस्तावेज और अनुमति लेकर आएं, उसके बाद ही आगे का काम होने दिया जाएगा.
मेट्रो प्रशासन की सफाई- 'हमारे पास सभी जरूरी परमिशन हैं'
वहीं, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मेट्रो प्रशासन ने अपना पक्ष रखा है. 'एमपी तक' से बातचीत में मेट्रो के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) धीरज शुक्ला ने विधायक के आरोपों को खारिज किया.
धीरज शुक्ला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मेट्रो का निर्माण कार्य सभी कानूनी एवं आवश्यक अनुमतियों के साथ ही किया जा रहा है. बिना अनुमति के इतना बड़ा प्रोजेक्ट चलाना संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि फिलहाल कब्रिस्तान से जुड़ी जगह से सिर्फ सामान और बाधाएं हटवाने का काम किया जा रहा था.
सियासी पारा गरमाया
देर रात हुए इस पूरे घटनाक्रम और तीखी बहस ने भोपाल के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. एक तरफ स्थानीय विधायक कब्रिस्तान की जमीन और औकाफ की अनुमति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मेट्रो प्रशासन अपनी वैधानिक प्रक्रियाओं का दावा कर रहा है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को कैसे सुलझाता है.
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