मध्य प्रदेश के किसानों को अब QR Code से मिलेगी खाद, किसानों के लिए एग्रीस्टैक और QR Code आधारित नई व्यवस्था लाएगी सरकार.

आकांक्षा ठाकुर

• 07:47 PM • 30 Oct 2026

केंद्र सरकार खाद सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए एग्रीस्टैक और QR Code आधारित नई बिक्री व्यवस्था लाने की तैयारी में है. दिसंबर में मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस पर होगी चर्चा. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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अपने खेत में खाद डालता किसान
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दिल्ली/ भोपाल: केंद्र सरकार देश में खाद सब्सिडी के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के लिए उर्वरक (फर्टिलाइजर) बिक्री व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. इसके तहत किसानों को उनकी जमीन और फसल के अनुसार खाद का कोटा तय करने के लिए एग्रीस्टैक (AgriStack) आधारित नई व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इस योजना के तहत हर किसान का कोटा क्यूआर कोड (QR Code) से जोड़ा जाएगा और उन्हें उनके क्षेत्र के निर्धारित खाद विक्रेता के माध्यम से ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा.

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इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक सब्सिडी वाला खाद उपलब्ध कराना और साथ ही इसकी कालाबाजारी, गैर-कृषि इस्तेमाल तथा दूसरे देशों में होने वाली तस्करी पर रोक लगाना है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर के अंतिम सप्ताह में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस अहम मुद्दे पर राज्यों के साथ चर्चा कर सकते हैं. केंद्र सरकार राज्यों से इस नए 'फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स' को अपनाने का आग्रह करेगी. हालांकि, इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए राज्यों का सहयोग बेहद अहम होगा.

मोबाइल ऐप से होगी बुकिंग, QR Code और बायोमेट्रिक से मिलेगी खाद

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, किसान या उनके अधिकृत प्रतिनिधि एक मोबाइल ऐप पर रजिस्ट्रेशन करके अपनी जमीन और फसल की पूरी जानकारी दर्ज करेंगे. इसके बाद वे अपनी जरूरत के अनुसार खाद की एडवांस (अग्रिम) बुकिंग कर सकेंगे. बुकिंग की पुष्टि होने के बाद एक क्यूआर कोड वाला टोकन जारी किया जाएगा.

जब किसान खाद खरीदने के लिए निर्धारित ट्रेडर्स के पास पहुंचेंगे, तो पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन के जरिए इस क्यूआर कोड को स्कैन किया जाएगा. इसके बाद आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (Aadhaar-based Biometric Authentication) के जरिए किसानों को खाद वितरित की जाएगी.

 

यह पूरी व्यवस्था मौजूदा इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) और PoS नेटवर्क को मोबाइल ऐप आधारित बुकिंग से जोड़ने के लिए तैयार की जा रही है. वर्तमान में IFMS नेटवर्क के दायरे में 14 करोड़ से अधिक आधार से जुड़े खाद खरीदार और 2.5 लाख से ज्यादा खुदरा विक्रेता शामिल हैं.

222 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान घटी खाद की बिक्री

रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ 2026 के दौरान देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 222 जिलों में इस नई व्यवस्था का पायलट परीक्षण किया गया था. इस दौरान खाद की कुल बिक्री में 28 प्रतिशत की खासी गिरावट दर्ज की गई. इसी सकारात्मक परिणाम को देखते हुए अब केंद्र सरकार इसे देशव्‍यापी स्तर पर लागू करने के लिए राज्यों का सहयोग मांगने जा रही है.

सरकार का मानना है कि जमीन और फसल के आधार पर खाद की उपलब्धता तय करने से जरूरत से ज्यादा खरीदारी और सब्सिडी वाले उर्वरकों के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सकती है. इससे मिट्टी की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले अत्यधिक खाद के इस्तेमाल को भी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

मध्य प्रदेश में बची 764 करोड़ रुपये की सब्सिडी

मध्य प्रदेश उन प्रमुख राज्यों में शामिल है जहाँ इस नई व्यवस्था को लागू किया गया था. राज्य की 'ई-विकास' पहल के तहत किसानों के एग्रीस्टैक डेटा का इस्तेमाल किया जाता है. मध्य प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खरीफ 2026 के दौरान राज्य में खाद की खपत घटकर 32 लाख टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 36 लाख टन थी. खपत में आई इस कमी से राज्य को 764 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचाने में मदद मिली.

खाद की बिक्री और खपत बढ़ने के साथ लगातार बढ़ रहे सब्सिडी के बोझ के बीच यह उदाहरण केंद्र सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि बिक्री या खपत में कमी आने मात्र से यह स्वतः स्पष्ट नहीं हो जाता कि सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद मिल गई है. ऐसे में इस नई व्यवस्था की असली सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वास्तविक जरूरत वाले किसानों को समय पर खाद सुलभ हो सके.