MP News: दतिया उपचुनाव में किसके सिर सजेगा जीत का ताज? नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद क्या है जनता का मूड, जानिए ग्राउंड रिपोर्ट

आकांक्षा ठाकुर

• 09:03 AM • 27 Jul 2026

Datia By-Election: दतिया सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है, जहां नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उपजी नाराजगी अब थमती नजर आ रही है और मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच देखा जा रहा है.

दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी तपिश बढ़ी
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी तपिश बढ़ी
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मध्य प्रदेश की चर्चित सीटों में शुमार दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी तपिश बढ़ी हुई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां इस सीट पर जीत का परचम लहराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं. पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया का चुनावी समीकरण कितना बदला है और यहां की जनता का रुख किस तरफ है, इसका जायजा लेने सहयोगी न्यूज चैनल MP Tak की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची.

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नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर क्या बोली दतिया की जनता?

शुरुआत में बीजेपी द्वारा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने के बाद उनके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी गई थी. हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब आम जनता से बातचीत की गई, तो अधिकांश लोगों का कहना था कि आलाकमान के फैसले के बाद अब वह नाराजगी खत्म हो चुकी है.

स्थानीय लोगों और समर्थकों का मानना है:

  • पार्टी के साथ खड़े हैं नरोत्तम मिश्रा: समर्थकों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा लगातार पार्टी और बीजेपी प्रत्याशी के साथ मजबूती से खड़े हैं, इसलिए कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी अब दूर हो गई है.
  • विकास का मुद्दा प्रमुख: जनता का कहना है कि दतिया का विकास केवल नरोत्तम मिश्रा के दौर में हुआ था और अब सत्ताधारी पार्टी का विधायक होने पर ही क्षेत्र का विकास आगे बढ़ सकेगा.

2.5 साल के विकास पर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कई स्थानीय निवासियों ने वर्तमान कांग्रेस स्थिति और पिछले ढाई सालों के कामकाज पर नाराजगी जताई.

  • दिखाई नहीं दिए विधायक: लोगों का आरोप था कि पिछले ढाई सालों में क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह ठप रहे. विधायक जीतने के बाद जनता के बीच नजर नहीं आए.
  • सत्ता के साथ जाने की होड़: स्थानीय लोगों की राय है कि चूंकि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसलिए यदि दतिया से भी बीजेपी का विधायक चुनकर आता है, तो रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे.

कांग्रेस के पक्ष में क्या है तर्क?

हालांकि, बातचीत के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में भी अपनी बात रखी:

  • नया चेहरा और परिचय की चुनौती: कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि बीजेपी ने जिस नए प्रत्याशी को मैदान में उतारा है, उसे क्षेत्र की जनता ठीक से जानती नहीं है और उसे अपना परिचय देना पड़ रहा है.
  • जीत का दावा: कुछ मतदाताओं ने दावा किया कि कांग्रेस प्रत्याशी यहां मजबूत स्थिति में हैं और वे भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज करेंगे.

वहीं, चुनाव मैदान में उतरे तीसरे कोण यानी दामोदर यादव को लेकर जनता का मिला-जुला रुख दिखा. अधिकतर लोगों का मानना था कि मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है और वे तीसरे स्थान पर रह सकते हैं. 

दतिया का यह मुकाबला बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच चुका है. एक तरफ जहां बीजेपी प्रत्याशी 'प्रदेश में सरकार' और 'विकास' के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और नए प्रत्याशी की कमियों को भुनाने में लगी है. जनता का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो चुनावी नतीजों के दिन ही साफ हो पाएगा.

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