दतिया उपचुनाव: कौन थे MP के वो दो मंत्री जिन्होंने किया था नरोत्तम मिश्रा का किया था समर्थन

आकांक्षा ठाकुर

• 12:30 PM • 12 Jul 2026

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव सीट से बीजेपी ने दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है. आंतरिक सर्वे में रिपोर्ट ठीक न होने के कारण नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा है, जिससे उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है.

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मध्य प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन चुकी दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है. बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर सबको चौंका दिया है. उनकी जगह पार्टी ने आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया है. इस फैसले के बाद से ही मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कैसे साफ हो गया?

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MP के दो ताकतवर मंत्रियों ने की थी नरोत्तम के नाम की सिफारिश

सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है कि जब मध्य प्रदेश बीजेपी संगठन की बैठक में दिल्ली नाम भेजने को लेकर मंथन चल रहा था, तब सूबे के दो कद्दावर मंत्रियों ने नरोत्तम मिश्रा के नाम की खुलकर वकालत की थी. ये दो नाम कोई और नहीं बल्कि कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद सिंह पटेल हैं. सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश संगठन की तरफ से दिल्ली आलाकमान को नरोत्तम मिश्रा का ही नाम सिंगल पैनल में भेजा गया था.

फिर क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?

पार्टी के बड़े नेताओं के समर्थन के बावजूद नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने की मुख्य वजह बीजेपी का आंतरिक (इंटरनल) सर्वे माना जा रहा है. बीजेपी ने दतिया सीट पर एक आंतरिक सर्वे कराया था, जिसकी फीडबैक रिपोर्ट में नरोत्तम मिश्रा की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिखाई दी. पार्टी आलाकमान उनकी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं था, जिसके चलते रिस्क न लेते हुए संगठन ने आशुतोष तिवारी के चेहरे पर भरोसा जताया.

दतिया में भारी बवाल

टिकट कटने की खबर आते ही दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है. कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि विजुअल्स में कुछ समर्थक खुद पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) और पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश करते नजर आए.

बढ़ते बवाल को देखते हुए खुद नरोत्तम मिश्रा को सामने आना पड़ा. उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, "यह धैर्य और संयम का समय है, यही परीक्षा की घड़ी होती है. कार्यकर्ता आवेश में आकर ऐसा कदम न उठाएं, चक्काजाम की स्थिति नहीं होनी चाहिए. पार्टी फोरम पर अपनी बात रखने का अनुशासित तरीका अपनाएं."

क्या बदला जाएगा बीजेपी का उम्मीदवार?

नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी और टिकट बदलने की मांग पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पार्टी का फैसला आखिरी है. विजयवर्गीय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "पार्टी के अंदर डेमोक्रेसी है, इसलिए कार्यकर्ता अपनी अभिव्यक्ति कर रहे हैं. लेकिन बीजेपी का कार्यकर्ता बहुत अनुशासित है, उनसे बैठकर बात कर ली जाएगी. नरोत्तम जी बहुत पुराने और समर्पित कार्यकर्ता हैं, वह भी पार्टी के लिए काम करेंगे."

टिकट बदलने की संभावना पर उन्होंने स्पष्ट किया, "भारतीय जनता पार्टी में एक बार टिकट डिक्लेअर होने के बाद उसे बदलने की कोई परंपरा नहीं रही है. इसलिए टिकट बदलने का कोई सवाल ही नहीं उठता. आशुतोष तिवारी बहुत अच्छे कार्यकर्ता हैं और वह भारी वोटों से चुनाव जीतेंगे."

क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव?

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को शिकस्त दी थी. लेकिन अप्रैल 2026 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े फर्जीवाड़े के एक मामले में 3 साल की सजा सुना दी, जिसके बाद उनकी विधायकी रद्द कर दी गई. सीट खाली होने के बाद चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव की घोषणा की है. दतिया में 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे.

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपने बागी कार्यकर्ताओं को शांत कराकर नए प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए चुनाव प्रचार करने मैदान में उतरते हैं या नहीं. वहीं, दूसरी तरफ अब सबको इंतजार कांग्रेस के पत्ते खोलने का है कि वह राजेंद्र भारती पर दोबारा दांव खेलती है या किसी नए चेहरे को मैदान में उतारती है.