Datia By-election: दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस सीट को हर हाल में अपने पाले में लाने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी चुनावी घमासान के बीच बीजेपी ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेलते हुए अपनी 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का ऐलान किया है, जिसकी कमान क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सौंपी गई है.
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पिछले विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेलने के बाद से ही सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि पार्टी नरोत्तम मिश्रा को क्या भूमिका देगी. अब दतिया फतह करने की मुख्य जिम्मेदारी उनके कंधों पर डालकर आलाकमान ने यह साफ संदेश दे दिया है कि क्षेत्र में उनके रसूख और जमीनी पकड़ का कोई दूसरा विकल्प नहीं है.
दिग्गजों की फौज मैदान में, हर मोर्चे पर घेराबंदी
बीजेपी ने दतिया की इस जंग को जीतने के लिए सिर्फ रणनीतिक बदलाव ही नहीं किए हैं, बल्कि नरोत्तम मिश्रा के साथ अनुभवी और दिग्गज नेताओं की एक मजबूत फौज भी मैदान में उतार दी है. इस नई समिति में पूर्व मंत्री अरविंद भदोरिया को चुनाव अभियान प्रमुख और पूर्व विधायक रणवीर रावत को सह-प्रमुख की अहम जिम्मेदारी दी गई है. इस पूरी टीम का गठन दतिया के चुनाव प्रभारी व सांसद भरत सिंह कुशवाहा की सहमति से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने किया है.
इस रणनीति की सबसे खास बात यह है कि इसमें जमीनी स्तर के नेताओं को तरजीह दी गई है, जिसमें दतिया के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा और सेवड़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल समेत जिला पंचायत और नगर पालिका के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि बूथ स्तर पर वोट बैंक को पूरी तरह मजबूत किया जा सके.
क्या पहले ही मिल गया था बड़ी जिम्मेदारी का संकेत?
इस बड़े फैसले के बाद राजनीतिक हल्कों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि क्या बीजेपी सांसद भरत सिंह कुशवाहा की भविष्यवाणी सच साबित हो गई है. दरअसल, कुछ दिनों पहले मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संकेत दिया था कि नरोत्तम मिश्रा जैसे अनुशासित और वरिष्ठ कार्यकर्ता को पार्टी कभी घर नहीं बैठने देगी और उन्हें जल्द ही कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी.
उन्होंने यह भी साझा किया था कि नरोत्तम मिश्रा खुद घर-घर जाकर जनता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने वाले हैं. अब उन्हें इस महत्वपूर्ण समिति का सर्वेसर्वा बनाए जाने के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है.
जाति का गणित: क्यों फूंक-फूंक कर कदम रख रही है BJP?
दतिया का चुनावी रास्ता हमेशा से ही जटिल जातीय समीकरणों से होकर गुजरता है, यही वजह है कि बीजेपी ने इस 32 सदस्यीय टीम में हर वर्ग और जाति को साधने की पूरी कोशिश की है. अगर यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को समझें, तो करीब 14.8 प्रतिशत आबादी के साथ ब्राह्मण मतदाता यहाँ सबसे निर्णायक भूमिका में हैं. इसके ठीक बाद लगभग 14.7 प्रतिशत हिस्सेदारी अहिरवार और जाटव वोटर्स की है, जबकि कुशवाहा और काछी समाज के मतदाता तकरीबन 12.2 प्रतिशत हैं.
इसके अलावा 7.4 प्रतिशत यादव और 6.9 प्रतिशत लोधी समाज के वोटर भी हार-जीत का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व में बनी यह टीम इसी सामाजिक संतुलन को साधकर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने का काम करेगी. अब देखना दिलचस्प होगा कि नरोत्तम मिश्रा की अगुवाई वाली यह 'सुपर 32' टीम दतिया में दोबारा कमल खिलाने में कितनी कामयाब होती है.
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