Datia Byelection Congress Candidate: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव इस वक्त देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. जहां एक तरफ बीजेपी ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतार दिया है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपना पत्ता खोलते हुए 72 साल के कद्दावर नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है .
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उम्मीदवारी की घोषणा के बाद घनश्याम सिंह ने क्या कहा
अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद आत्मविश्वास से लबरेज घनश्याम सिंह ने कहा,
"मैं यह उपचुनाव भारी मतों से जीतने जा रहा हूँ . मेरा लक्ष्य दतिया का विकास करना और यहाँ पिछले कुछ समय से पैर पसार चुकी बदले की राजनीति व जातिवाद के जहर को पूरी तरह खत्म करना है ."
कौन है घनश्याम सिंह
72 साल के घनश्याम सिंह का दतिया की राजनीति में एक अलग ही रसूख है. दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम सिंह के परिवार का सियासी इतिहास काफी पुराना है. उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव साल 1984 में भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं. अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए घनश्याम सिंह ने तीन दशकों तक क्षेत्र की जनता के बीच काम किया है. वे दो बार दतिया से और एक बार सेवढ़ा विधानसभा से विधायक चुने जा चुके हैं.
उतार-चढ़ाव से भरा रहा है सियासी सफर
घनश्याम सिंह की राजनीतिक यात्रा जीत और हार के कई मोड़ों से होकर गुजरी है:
- 1993 (पहली जीत): कांग्रेस के टिकट पर पहली बार दतिया से चुनाव लड़ा और भाजपा के शंभु तिवारी को हराकर विधानसभा पहुंचे .
- 1998 (टिकट कटा): पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया जिसका खामियाजा कांग्रेस को सीट गंवाकर भुगतना पड़ा .
- 2003 (शानदार वापसी): कांग्रेस ने फिर भरोसा जताया और उन्होंने राजेंद्र भारती को शिकस्त देकर दूसरी बार जीत दर्ज की .
- 2008 (बड़ा उलटफेर): बीजेपी के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा से उन्हें हार का सामना करना पड़ा .
सेवढ़ा में भी आजमाया भाग्य
दतिया के बाद कांग्रेस ने साल 2013 में उन्हें सेवढ़ा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन वे बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल से महज 1,800 वोटों के करीबी अंतर से हार गए . इसके बाद 2018 में उन्होंने जोरदार वापसी की और बीजेपी के राधेलाल बघेल को हराकर फिर विधायक बने . हालांकि, 2023 के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल ने उन्हें एक बार फिर शिकस्त दे दी थी .
बेहद दिलचस्प होगा मुकाबला
क्योंकि बीजेपी पहले ही आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान कर चुकी है, इसलिए अब दतिया का यह उपचुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है . एक तरफ जहां घनश्याम सिंह के पास तीन दशक लंबा राजनीतिक अनुभव और राजघराने का प्रभाव है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के आशुतोष तिवारी युवा ऊर्जा के साथ मैदान में हैं .
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