मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर चल रही तमाम राजनीतिक अटकलों पर आज पूरी तरह से विराम लग गया है. टिकट कटने के बाद पहली बार पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और बीजेपी के नवनियुक्त प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कैमरे के सामने एक साथ नजर आए. दतिया एयरपोर्ट से सामने आई इन तस्वीरों ने न सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है, बल्कि विपक्ष को भी एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दे दिया है.
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एयरपोर्ट पर हुआ गर्मजोशी से स्वागत
दरअसल, यह मौका था बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के नामांकन (Nomination) का. इस खास मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हेलीकॉप्टर से दतिया एयरपोर्ट पहुंचे. जैसे ही हेलीकॉप्टर लैंड हुआ और नरोत्तम मिश्रा नीचे उतरे, वहां पहले से मौजूद आशुतोष तिवारी दौड़कर उनके पास पहुंचे. आशुतोष ने नरोत्तम मिश्रा के गले में गर्मजोशी से गमछा पहनाया, जिसके जवाब में वरिष्ठ नेता ने भी उन्हें गले लगा लिया और मुस्कुराते हुए पीठ थपथपाई.
'आशुतोष मेरा भाई है और हम कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे'
एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ थाम रखा था और बीच में मुख्यमंत्री मोहन यादव चल रहे थे. मीडिया से बातचीत के दौरान जब नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया कि क्या बीजेपी प्रत्याशी को उनका आशीर्वाद प्राप्त है, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा, "आशीर्वाद क्या है, आशुतोष मेरा भाई है. हम दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे, चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे."
जब उनसे कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर पूछा गया, तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, "कांग्रेस इन्हीं फालतू बातों को कर-करके देश के 80 फीसदी हिस्से से साफ हो चुकी है और यहां भी गायब हो जाएगी. मध्य प्रदेश में तो कांग्रेस वैसे भी वेंटिलेटर पर है."
आशुतोष बोले- 'नरोत्तम जी मेरे अभिभावक हैं'
वहीं, बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी नरोत्तम मिश्रा के प्रति पूरा सम्मान दिखाते हुए कहा, "मैंने शुरुआत से ही कहा है कि भाई साहब (नरोत्तम मिश्रा) का मुझे बड़ा सानिध्य प्राप्त है. वे हमारे अभिभावक हैं. उनके मार्गदर्शन में ही मैं पिछले 25-30 वर्षों से राजनीति सीखता चला आ रहा हूँ और आगे भी उनका आशीर्वाद हमारे साथ रहेगा."
कार्यकर्ताओं और विपक्ष के लिए बड़ा संदेश
टिकट घोषित होने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन नामांकन के दिन दोनों नेताओं का सार्वजनिक रूप से गले मिलना, एक-दूसरे का हाथ थामना और 'भाई-अभिभावक' का रिश्ता बताना महज एक औपचारिकता नहीं है. इसे कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और विपक्ष के 'डैमेज' वाले दावों की हवा निकालने की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है. इन तस्वीरों के जरिए बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि दतिया का यह उपचुनाव किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरे संगठन का है.
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