मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा टिकट की घोषणा के बाद से ही सियासी पारा चढ़ गया है . बीजेपी ने इस सीट से पूर्व गृह मंत्री और कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस फैसले के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है. दतिया में जगह-जगह चक्काजाम, गाड़ियों में तोड़फोड़, पथराव और यहां तक कि आत्मदाह के प्रयास जैसी खबरें सामने आई हैं. पूरे दतिया शहर में बाजार बंद हैं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है.
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इस पूरे बवाल और टिकट कटने के घटनाक्रम के बीच, नरोत्तम मिश्रा ने डबरा से भोपाल जाते समय ट्रेन में सफर के दौरान 'आजतक' से एक्सक्लूसिव बातचीत की और अपनी चुप्पी तोड़ी .
पार्टी का फैसला हमेशा ठीक होता है
जब नरोत्तम मिश्रा से पूछा गया कि दतिया से उन्हें इकलौता उम्मीदवार माना जा रहा था फिर भी टिकट कटने के फैसले को वह कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने बेहद सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा, "पार्टी का फैसला जो होता है वह ठीक ही होता है . उसको अच्छे रूप में ही लेना चाहिए, खराब रूप में नहीं लेना चाहिए, ऐसा मेरी मान्यता है ."
समर्थकों के बवाल और इस्तीफों पर जताई चिंता
दतिया में समर्थकों द्वारा हाईवे जाम करने, गाड़ियों में तोड़फोड़ करने और कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा खुद पर पेट्रोल/मिट्टी का तेल डालने के विजुअल्स पर नरोत्तम मिश्रा ने चिंता व्यक्त की . उन्होंने कहा, "यह क्षणिक आवेश था . मैंने कल भी उनसे निवेदन किया था और आज भी कर रहा हूं कि जाम जैसी स्थिति नहीं होना चाहिए . कार्यकर्ताओं को पेट्रोल और मिट्टी का तेल डालते हुए मैंने विजुअल फुटेज में देखा है . धैर्य और संयम का समय यही होता है, यही परीक्षा की घड़ी होती है . पार्टी फोरम पर अपनी बात रखने का अपना एक तरीका है, उस तरीके को अपनाएं और अनुशासित रहें ."
दतिया भाजपा में बड़े पैमाने पर हो रहे इस्तीफों और जिला अध्यक्ष तक के पद छोड़ने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि वह जल्द ही सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बैठकर चर्चा करेंगे .
आशुतोष तिवारी को आशीर्वाद और पार्टी के फैसले का सम्मान
जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को उनका आशीर्वाद रहेगा, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, "सभी को क्यों नहीं रहेगा, कैसी बात कर रहे हैं ." भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा नरोत्तम मिश्रा की तारीफ किए जाने और यह कहे जाने पर कि वह हमेशा पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हैं, नरोत्तम मिश्रा ने सहमति जताते हुए कहा कि विजयवर्गीय ने बिल्कुल सही कहा है .
राजनीति में लगातार मिल रहे उतार-चढ़ाव और बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखे जाने के सवाल पर उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा, "यह अंतर्मुखी होकर स्वयं के चिंतन के लिए पार्टी अवसर दे रही है, हमें चिंतन करना भी चाहिए, यह अच्छी बात है ."
अंत में अपने पुराने और मशहूर बयान "मेरा पानी कम होते देख किनारे पे घर मत बना लेना..." पर दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "अब आराम से घर बनाएं, क्या दिक्कत है ." उन्होंने एक बार फिर दतिया की जनता और अपने कार्यकर्ताओं से केवल एक ही संदेश दिया- "संयम, धैर्य और शांति का परिचय दें ."
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