मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बेहद तेज हो गई है. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों ने इस सीट को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी बीच, प्रसिद्ध पंडोखर सरकार ने दतिया उपचुनाव के नतीजों को लेकर एक हैरान करने वाली भविष्यवाणी कर दी है, जिसने राज्य के सियासी पारे को और बढ़ा दिया है. पंडोखर सरकार ने वैसे तो इस उपचुनाव को लेकर बहुत ज्यादा खुलकर कुछ भी कहने से फिलहाल इनकार किया, लेकिन उन्होंने राजनीतिक समीकरणों को लेकर एक बड़ा इशारा जरूर कर दिया है.
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बीजेपी की स्थिति मजबूत, कांग्रेस से मिलेगी कड़ी टक्कर
पंडोखर सरकार ने दतिया उपचुनाव के समीकरणों पर बात करते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति काफी प्रबल दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि सूबे में बीजेपी की सरकार है और धरातल पर जो परिस्थितियां दिख रही हैं, उस हिसाब से बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. हालांकि, उन्होंने कांग्रेस को भी कमजोर नहीं माना और साफ किया कि इस चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला नहीं होगा, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस के अनुभवी नेता घनश्याम सिंह के बीच बेहद भारी और कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी. पंडोखर सरकार के मुताबिक, हार-जीत का यह मुकाबला काफी नजदीकी रहने वाला है.
प्रत्याशियों के आने पर सटीक भविष्यवाणी का दावा
पंडोखर सरकार, जिनका असली नाम गुरु शरण शर्मा है और जो दतिया जिले के पंडोखर धाम के पीठाधीश्वर हैं, उन्होंने एक और दिलचस्प बात कही है. उन्होंने दावा किया कि यदि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग उनके पास आते हैं, तो वह दोनों के समीकरणों की विस्तृत समीक्षा करके बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी कर सकते हैं कि कौन सा उम्मीदवार चुनाव जीतेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में कई बार जैसा धरातल पर दिखता है, परिणाम वैसा नहीं होता, इसलिए उम्मीदवारों के आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट की जा सकती है.
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना बना चर्चा का विषय
दतिया के इस उपचुनाव में बीजेपी ने इस बार एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है. पार्टी ने सूबे के पूर्व गृह मंत्री और क्षेत्र के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है. नरोत्तम मिश्रा इस सीट से लगातार चुनाव लड़ते आ रहे थे, लेकिन पिछले मुख्य विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. कहा जा रहा है कि इसी वजह से बीजेपी ने इस बार उनकी जगह नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जो पूरे मध्य प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने एक बार फिर अपने पुराने और बेहद अनुभवी नेता घनश्याम सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है.
जानिए दतिया में क्यों हो रहा है यह उपचुनाव
दतिया में दोबारा चुनाव होने की वजह बेहद खास है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेंद्र भारती ने जीत दर्ज की थी. लेकिन इसके बाद गबन के एक पुराने मामले में राजेंद्र भारती को कोर्ट द्वारा 3 साल की सजा सुना दी गई. सजा मिलने के कारण विधानसभा सचिवालय ने उन्हें विधायक पद के अयोग्य घोषित कर दिया और दतिया सीट को रिक्त (खाली) घोषित कर दिया गया, जिसके चलते यहां फिर से चुनावी बिगुल फूंकना पड़ा है.
3 अगस्त को आएगा अंतिम फैसला
सियासी दलों के बड़े-बड़े दावों के बीच अब दतिया की जनता और नेताओं की नजरें पंडोखर सरकार की इस भविष्यवाणी और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं. पंडोखर सरकार अपने दिव्य दरबार में लोगों की समस्याओं को बिना बताए पर्ची पर लिख देने के दावे के लिए जाने जाते हैं और राजनीति पर उनकी भविष्यवाणियां अक्सर चर्चा में रहती हैं. अब सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि क्या नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी पर दांव खेलने वाली बीजेपी पंडोखर सरकार के दावे के मुताबिक बाजी मारेगी, या फिर कांग्रेस इस भविष्यवाणी को गलत साबित कर दतिया के तख्त पर कब्जा करेगी. इस शह और मात के खेल का अंतिम फैसला 3 अगस्त को साफ हो जाएगा.
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