सागर के बाद देवास में 13 मौतों का दावा, जहरीली शराब से किसी की मौत तो किसी की आंखों की रोशनी गई ?

गौरव जगताप

24 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 24 2026 6:34 PM)

देवास जिले के चंदना और बिंजाना गांव में करीब 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की मौत का दावा सामने आया है. परिजनों ने कथित जहरीली शराब को मौतों की वजह बताया है. आरोप है कि शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी और कुछ की आंखों की रोशनी चली गई. कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और अरुण यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए. वहीं, प्रशासन ने जहरीली शराब से मौत होने से इनकार करते हुए जांच में जहरीले तत्व नहीं मिलने का दावा किया है. अब मौतों की वास्तविक वजह को लेकर जांच के निष्कर्षों पर नजर है.

देवास में 20 दिन में 13 मौतों का दावा, जहरीली शराब या कुछ और है वजह?
जहरीली शराब पीने से मौत होने का दावा
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मध्य प्रदेश के देवास का चंदना और बिंजाना गांव में करीब 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की मौत होने का दावा सामने आया है. मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने इन मौतों के पीछे कथित जहरीली शराब को जिम्मेदार ठहराया है. आरोप है कि शराब पीने के बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ी, उल्टियां होने लगीं और कुछ की आंखों की रोशनी तक चली गई. हालांकि, प्रशासन ने मौतों को जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार किया है. ऐसे में इन मौतों की वजह और प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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13 मौतों को शराब से जोड़ रहे परिजन

ग्रामीणों के मुताबिक, 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच दोनों गांवों में 13 लोगों की मौत हुई. परिजनों का आरोप है कि इनमें से 10 लोगों की मौत कथित तौर पर जहरीली शराब पीने के कारण हुई. उनका कहना है कि शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ी और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. चंदना गांव में लगातार हुई मौतों के बाद ग्रामीणों ने शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. परिजनों का कहना है कि घटनाओं के क्रम की गंभीरता से जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या था.

शराब पीने के बाद आंखों की रोशनी जाने का आरोप

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप शराब पीने के बाद लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने को लेकर हैं. परिजनों के मुताबिक, 32 वर्षीय चेतन की 27 सितंबर को शराब पीने के बाद तबीयत बिगड़ गई थी. उसे उल्टियां होने लगीं. अस्पताल में इलाज के बाद उसकी जान बच गई, लेकिन परिवार का दावा है कि उसकी आंखों की रोशनी चली गई. इसी तरह संजय के परिजनों ने भी शराब पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने और आंखों की रोशनी जाने का आरोप लगाया है. संजय के भाई के मुताबिक, उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इन मामलों में शराब और आंखों की रोशनी प्रभावित होने के बीच संबंध की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि सामने आना जरूरी है. फिलहाल परिजन इन घटनाओं को कथित जहरीली शराब से जोड़ रहे हैं.

4 दोस्तों की मौत से बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के मुताबिक, चंदना गांव में 15 अक्टूबर को चार दोस्तों ने एक साथ बैठकर शराब पी थी. इनमें दीपक रावत, जितेंद्र, ओमप्रकाश और भीमा के नाम बताए जा रहे हैं. दावा है कि अगले दिन चारों की मौत हो गई. इसके अलावा केशव प्रसाद, संजय, मोहन, सुनील और वीर दरबार सिंह की मौतों को लेकर भी ग्रामीणों और परिजनों ने सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि घटनाओं की कड़ियों को गंभीरता से जांचा जाना चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि मृतकों ने किस जगह से शराब खरीदी थी तथा उसकी गुणवत्ता कैसी थी. हालांकि, इन सभी मौतों का कारण जहरीली शराब होना अभी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है. 

जीतू पटवारी ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

मामले को लेकर कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और अरुण यादव ने देवास के चंदना गांव का दौरा किया. दोनों नेताओं ने कथित जहरीली शराब पीने से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उनका दौरा ऐसे समय हुआ है, जब ग्रामीणों की शिकायतों और प्रशासन के दावों के बीच मौतों की वास्तविक वजह को लेकर सवाल बने हुए है. 

प्रशासन मृतकों की विसरा रिपोर्ट का कर रहा इंतजार  

दूसरी ओर प्रशासन ने चंदना गांव में हुई  मौतों के पीछे अन्य कारण हैं. प्रशासन का दावा है कि शराब की जांच में कोई जहरीला तत्व नहीं मिला है. इस आधार पर अधिकारियों ने मौतों को जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार किया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी 

जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजर

देवास के चंदना और बिंजाना गांवों में हुई मौतों के मामले ने शराब की गुणवत्ता, उसकी बिक्री और संबंधित शिकायतों की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं. एक तरफ परिजन कथित जहरीली शराब को जिम्मेदार बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन जांच में जहरीले तत्व मिलने से इनकार कर रहा है. ऐसे में प्रत्येक मौत के मामले की चिकित्सकीय और तथ्यात्मक जांच, प्रभावित लोगों की आंखों की रोशनी संबंधी शिकायतों की पुष्टि और शराब के स्रोत की पड़ताल अहम है. जांच में यदि अवैध या मिलावटी शराब की भूमिका सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत होगी. फिलहाल, मौतों के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है. 

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