धार भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट के फैसले पर भड़के शहर काजी, कहा- 'यह एकपक्षीय फैसला, हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे'

धार भोजशाला मामले में एएसआई की रिपोर्ट को आधार मानकर आए हाई कोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने एकपक्षीय बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है और इसके खिलाफ जल्द सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान किया है.

धार भोजशाला विवाद
धार भोजशाला विवाद

रवीशपाल सिंह

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद (Bhojshala-Kamal Maula Mosque) विवाद में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. हाई कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए इसे मां वाग्देवी का मंदिर बताया है. हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद मुस्लिम पक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. धार के शहर काजी ने 'एमपी तक' से विशेष बातचीत में साफ किया कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे. 

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ASI की रिपोर्ट पर उठाए सवाल

शहर काजी ने एएसआई (ASI) की सर्वे रिपोर्ट को पूरी तरह से एकपक्षीय और किसी विशेष पक्ष को फायदा पहुंचाने वाली करार दिया. उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे के दौरान फिजिकल एक्सकैवेशन (भौतिक खुदाई) न करने का आदेश दिया था, इसके बावजूद वहां खुदाई की गई. खुदाई के दौरान वहां से प्लास्टिक के गिलास और चम्मच जैसी चीजें निकली थीं, जिसे एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया, जो इसकी निष्पक्षता पर शंका पैदा करता है".

'हाई कोर्ट द्वारा टाइटल डिसाइड करना आश्चर्यजनक'

काजी साहब ने अयोध्या (बाबरी मस्जिद) मामले के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 1991 के 'प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट' (विशेष प्रावधान अधिनियम) का हवाला देते हुए कहा कि जब शीर्ष अदालत ने कह दिया था कि ऐसा कोई दूसरा फैसला नहीं होगा, तो इसके बावजूद इस मामले की सुनवाई होना और टाइटल (स्वामित्व) डिसाइड करना बेहद आश्चर्यजनक है. आमतौर पर सिविल अदालतें टाइटल तय करती हैं, लेकिन अब हमें सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताना होगा कि हाई कोर्ट ने टाइटल डिसाइड कर दिया है.

जुम्मे की नमाज पर क्या बोले काजी?

जब उनसे पूछा गया कि हाई कोर्ट ने साल 2003 के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसके तहत शुक्रवार को नमाज पढ़ने की व्यवस्था थी, तो उन्होंने कहा कि 2003 का आदेश मुख्य रूप से दूसरे समुदाय को अंदर सामग्री (पुष्प और अक्षत) ले जाने की अनुमति देने के लिए था. नमाज की व्यवस्था तो 2003 से काफी पहले से चली आ रही है. हमारे पास सन 1935 के मराठा स्टेट का गजट नोटिफिकेशन है, जिसमें इसे स्पष्ट रूप से मस्जिद बताया गया है और नमाज जारी रखने की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश की कानूनी समीक्षा की जाएगी, लेकिन नमाज रोकने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है.

प्रशासन से शांति और सुरक्षा की अपील

शहर काजी ने पुलिस और जिला प्रशासन से अपील की है कि भोजशाला के आसपास का करीब 12 किलोमीटर का क्षेत्र वक्फ बोर्ड की जमीन है, जहां प्राचीन कब्रिस्तान और मजार मौजूद हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन्होंने शहर में धारा 163 लागू होने के बावजूद हो रही नारेबाजी और आतिशबाजी पर भी सवाल उठाए और कहा कि कानून का पालन सभी समुदायों के लिए समान रूप से होना चाहिए.

मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकीलों सलमान खुर्शीद, शोभा मेनन, नूर शेख और वारसी साहब की दलीलों का जिक्र करते हुए काजी ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और वे जल्द ही इस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे.


 

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