‘2 बजे हादसा, 4 बजे अस्पताल क्यों लाए ?’ ग्वालियर ट्रक हादसा में अपनों को खोकर बिलख पड़े परिजन !

गौरव जगताप

18 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 18 2026 12:36 PM)

ग्वालियर में ट्रक की चपेट में आने से 15 लोगों के कुचले जाने के बाद हड़कंप मच गया. हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हादसा दोपहर 2 बजे हुआ, तो घायलों को अस्पताल शाम 4 बजे क्यों लाया गया ? परिजनों के इन सवालों के बीच हादसे के बाद की स्थिति और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी को लेकर नाराजगी सामने आई है.

‘2 बजे हादसा, 4 बजे अस्पताल क्यों?’ ग्वालियर में अपनों को खोकर बिलख पड़े परिजन
मृतकों के परिजन
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को कुचल दिया. इस भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हैं. अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है. वहीं,अपनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है. अस्पताल परिसर में मातम के बीच परिजनों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। वे हादसे के बाद राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाने में कथित देरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं. हादसे में अपने बेटे दिव्यांश को खोने वाली उसकी मां का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा है. बेटे को याद कर उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद उन्हें सुबह करीब 6 बजे सूचना मिली. उनकी बेटी अपनों को तलाशने पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसे खोजने नहीं दिया. बेबस मां ने सवाल उठाया कि अगर यही दर्द किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी के अपने बच्चे के साथ होता, तो क्या उन्हें तकलीफ नहीं होती ?

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घायलों को अस्पताल पहुंचने में देरी के आरोप

हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों ने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि हादसे के बाद घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया. एक परिजन ने सवाल उठाया कि यदि हादसा रात करीब 2 बजे हुआ था, तो घायल को सुबह 4 बजे अस्पताल क्यों लाया गया ? परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज मिलता, तो शायद उनके बच्चे की जान बच सकती थी.  सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात को लेकर है कि परिवार को लगातार मरीज का इलाज चलने की जानकारी दी जाती रही, जबकि बाद में उन्हें उसकी मौत का पता चला. एक परिजन ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका बच्चा अब इस दुनिया में नहीं रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक परिवार को सच्चाई पता चली, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. परिजनों का गुस्सा उस वक्त और बढ़ गया, जब उनके मुताबिक अधिकारियों ने उनसे कागजात पर हस्ताक्षर करने को कहा. 

आंखों के सामने ट्रक ने मचाई तबाही

हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक महिला ने अपने भाई को खोने का दर्द साझा किया। उसने बताया कि वह और उसके परिवार के लोग मंदिर के अंदर चले गए थे, जबकि उसका भाई बाहर गेट के पास खड़ा था. इसी दौरान अचानक ट्रक आया और सीधे श्रद्धालुओं को रौंदता हुआ आगे बढ़ गया. कुछ ही पलों में मंदिर परिसर के पास चीख-पुकार मच गई और खुशियों के साथ दर्शन करने पहुंचे परिवारों में मातम छा गया.  


सीएम मोहन यादव ने किया आर्थिक सहायता का ऐलान

ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे पर मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने गहरा दुख जताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2-2 लाख रुपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं. साथ ही सभी घायलों का निशुल्क उपचार कराया जाएगा. सीएम ने मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और राकेश शुक्ला को ग्वालियर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मिलने के निर्देश भी दिए हैं. उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगतों की आत्मा की शांति, शोकाकुल परिवारों को दुख सहने की शक्ति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की.

ढलान पर खड़े ट्रक के अचानक चलने से हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, डबरा की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक चीनोर से शीतला माता मंदिर की तरफ उतरने वाली ढलान पर खड़ा था. आशंका जताई जा रही है कि प्रेशर रिलीज होने के कारण ट्रक अचानक ढलान पर तेजी से नीचे उतरने लगा. बेकाबू ट्रक ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को कुचल दिया और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक जा पहुंचा। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. इस दर्दनाक घटना में 15 लोगों की मौत के बाद कई परिवार उजड़ गए हैं, जबकि घायल जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं. एक तरफ अपनों को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ परिजन हादसे और कथित लापरवाही की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हादसे की वजह क्या थी, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी क्यों हुई और इन सवालों का जवाब कौन देगा ? 

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