इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने की घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है. इस गंभीर मामले पर पहली बार पूर्व लोकसभा स्पीकर और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन, जिन्हें लोग प्यार से ‘ताई’ कहते हैं, खुलकर सामने आईं और सिस्टम से लेकर नेताओं तक सभी की जवाबदेही तय करने की बात कही.
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‘MP Tak’ से बातचीत में ताई सुमित्रा महाजन ने कहा कि इंदौर के इतिहास में इस तरह की त्रासदी पहले कभी नहीं हुई. उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि इतने दिनों तक गंदा पानी लोगों तक पहुंचता रहा और किसी ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, यह बहुत दुखद है. उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना जताते हुए साफ शब्दों में कहा, “मैं इस घटना के लिए जनता से 10 बार माफी मांगती हूं, जिम्मेदारी तो लेनी ही पड़ेगी.”
अधिकारियों पर ताई का सख्त रुख
मेयर की यह शिकायत कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, इस पर भी सुमित्रा महाजन ने खुलकर राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधि मजबूत इरादे के साथ जनता के बीच खड़े होकर अधिकारियों को बुलाते हैं, तो अफसरों को काम करना ही पड़ता है. ताई ने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि वे तो तीन साल के लिए आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन नेताओं को यहीं रहकर 25 साल तक जनता को जवाब देना होता है.
दोष देने से कुछ नहीं होगा, खुद की गलती देखें
ताई ने यह भी कहा कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा. उन्होंने सभी पार्षदों, विधायकों और अधिकारियों से आत्म-निरीक्षण करने की अपील की. उनका कहना था कि अगर कहीं सिस्टम में कमी रह गई है, तो अनुभवी इंजीनियरों और रिटायर्ड एक्सपर्ट्स की मदद लेकर तुरंत सुधार किया जाना चाहिए.
इंदौर की जनता से अपील
सुमित्रा महाजन ने भरोसा जताया कि इंदौर के लोग दिल के साफ होते हैं और सच्चे मन से काम करने वालों को माफ भी कर देते हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी गलती मानें और उसे ठीक करने में ईमानदारी से जुट जाएं. उन्होंने कहा, “सिर्फ सत्ता में होना काफी नहीं होता, अच्छे काम को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है.”
ताई के इस बयान के बाद इंदौर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि आगे ठोस कदम कब और कैसे उठाए जाते हैं.
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