इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर के बृजेश्वरी एनिक्स में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस हादसे में एक ही परिवार के 8 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई थी. शुरुआत में हादसे की वजह को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब पुलिस जांच में जो सच सामने आया है, वह इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इस्तेमाल करने वालों के लिए एक बड़ा सबक है.
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एक छोटे से फैसले ने ली 8 जानें
हादसे की रात परिवार के सदस्य हर्षित ने अपनी इलेक्ट्रिक कार को दोबारा चार्जिंग पर लगाने का फैसला किया था. घर के बाहर खड़ी यही कार कुछ ही देर बाद आग का गोला बन गई. देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पास में खड़ी बाइक को भी अपनी चपेट में ले लिया. जब तक ग्राउंड फ्लोर पर सो रहे माता-पिता की नींद खुली और उन्होंने दरवाजा खोला, तब तक आग घर की दहलीज तक पहुँच चुकी थी.
चीख-पुकार और अफरा-तफरी का मंजर
आग लगने के बाद घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई. परिवार के लोगों ने खुद ही आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि काबू पाना नामुमकिन था. जान बचाने के लिए लोग बाहर की ओर भागे, लेकिन धुएं और आग के कारण सिर्फ 4 लोग ही बाहर निकलने में सफल रहे, बाकी 8 सदस्य आग की चपेट में आ गए और उनकी मौत हो गई.
जांच में खुला 'झूठ' का राज
शुरुआत में परिवार की ओर से यह दावा किया गया था कि कार चार्जिंग पर नहीं लगी थी और आग इलेक्ट्रिक पोल में स्पार्किंग की वजह से लगी थी. हालांकि, पुलिस की गहन पूछताछ और बिजली कंपनी के स्मार्ट मीटर डेटा ने हकीकत बयां कर दी. डेटा से पुष्टि हुई कि घटना के समय कार चार्जिंग पर ही लगी थी. पूछताछ में यह भी सामने आया कि बड़े भाई सौरभ ने चार्जर हटाया था, लेकिन हर्षित ने रात में इसे फिर से चार्जिंग पर लगा दिया था.
क्या कहती है पुलिस?
तिलक नगर थाना पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है. पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच और बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि एमसीबी (MCB) में शॉर्ट सर्किट या चार्जिंग पोर्ट में खराबी की वजह से यह हादसा हुआ हो सकता है. हालांकि, अभी टेक्निकल टीम की फाइनल रिपोर्ट आना बाकी है जिससे स्पष्ट होगा कि आग लगने का सटीक तकनीकी कारण क्या था.
EV यूजर्स के लिए बड़ी सीख
इंदौर की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए चेतावनी है जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं. चार्जिंग के नियमों की अनदेखी और रात भर गाड़ी को चार्जिंग पर छोड़ने की आदत जानलेवा साबित हो सकती है. तकनीक सुविधा के लिए है, लेकिन लापरवाही इसे आपदा बना देती है.
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