इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और 'मिनी मुंबई' कहे जाने वाले इंदौर से एक रूहकपा देने वाली खबर सामने आई है. बंगाली चौराहे के पास एक घर में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के 8 लोगों की जिंदगी लील ली. जहां एक तरफ प्रशासन और मंत्रियों ने शुरुआती जांच से पहले ही इसे 'ईवी कार चार्जिंग' (Electric Vehicle Charging) का शॉर्ट सर्किट बताया था, वहीं अब परिवार के जीवित बचे सदस्य के बयान ने पूरी कहानी बदल दी है.
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क्या कार चार्जिंग पर थी?
हादसे के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि घर के नीचे खड़ी टाटा पंच ईवी (Tata Punch EV) चार्जिंग पर लगी थी, जिससे ब्लास्ट हुआ, लेकिन घर के बेटे ने भावुक होते हुए बताया कि घटना वाली रात गाड़ी चार्जिंग पर थी ही नहीं. उनके मुताबिक, गाड़ी 85% चार्ज थी, इसलिए उसे प्लग-इन करने की जरूरत नहीं थी.
बिजली के खंभे पर उठ रहे सवाल
परिजनों का आरोप है कि घर के कोने पर स्थित बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर से चिंगारियां निकल रही थीं. आशंका जताई जा रही है कि खंभे से गिरी चिंगारी ने नीचे खड़ी पेट्रोल बाइक्स (बुलेट और एक्टिवा) में आग पकड़ी, जिसने देखते ही देखते पूरे घर को चपेट में ले लिया.
धमाकों की आवाज से दहला इलाका
पीड़ित ने बताया कि आग लगने के दौरान दो बड़े धमाके हुए, एक फर्स्ट फ्लोर पर लगे गीजर के गैस सिलेंडर का और दूसरा एसी (AC) कंप्रेसर का. इन धमाकों और धुएं के कारण अंदर सो रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और 15 मिनट के भीतर सब कुछ खाक हो गया.
स्मार्ट सिटी पर सवाल
इस हादसे ने इंदौर के 'स्मार्ट सिटी' टैग पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जब गैस और इंटरनेट की लाइनें जमीन के नीचे हो सकती हैं, तो बिजली के जर्जर तार आज भी खंभों पर क्यों लटके हैं? क्या यह सिर्फ एक हादसा था या सिस्टम की बड़ी लापरवाही?
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