मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यहां सीवर की सफाई करने उतरे नगर निगम के दो कर्मचारियों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा सोमवार रात को शहर के चोइथराम मंडी इलाके में हुआ. घटना ने एक बार फिर मैनुअल सीवर सफाई और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम करीब 6:30 बजे नगर निगम के दो कर्मचारी, करण यादव और अजय डोडिया, नियमित सफाई कार्य के लिए चोइथराम मंडी गेट के पास पहुंचे थे. सफाई के दौरान मशीन के पाइप का एक हिस्सा 30 फीट गहरे टैंक में गिर गया. उसे निकालने के लिए पहले एक कर्मचारी नीचे उतरा, लेकिन वह जहरीली गैस (मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड) के कारण बेहोश हो गया. उसे बचाने के लिए दूसरा कर्मचारी भी नीचे उतरा, लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सका.
सुरक्षा नियमों की सरेआम अनदेखी
इस हादसे में लापरवाही की कई परतें सामने आ रही हैं. बताया जा रहा है कि सफाई के दौरान सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं किया गया था:
- कर्मचारियों के पास न तो ऑक्सीजन मास्क था और न ही गैस डिटेक्टर, जिससे जहरीली गैस का पता लगाया जा सके.
- उन्होंने कोई सेफ्टी बेल्ट भी नहीं पहनी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सेफ्टी बेल्ट होती, तो उन्हें समय रहते बाहर निकाला जा सकता था.
- जहरीली गैस से बेहोश होने के बाद दोनों कर्मचारी सीवर के गंदे पानी में डूब गए, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई.
सरकार ने किया 30-30 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान
घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम कमिश्नर और महापौर मौके पर पहुंचे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया गया है. यह मुआवजा राशि सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के तहत दी जा रही है, जिसमें सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों के लिए मुआवजे की राशि तय की गई है.
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम
राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. डीसीपी ऋषिकेश लाल चंदानी ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का आधिकारिक खुलासा होगा.
इंदौर जैसे शहर में, जिसे 'मिनी मुंबई' कहा जाता है, इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा धब्बा है. सुप्रीम कोर्ट के बार-बार प्रतिबंध और दिशा-निर्देशों के बावजूद इंसानों द्वारा सीवर की मैनुअल सफाई जारी रहना प्रशासन की बड़ी विफलता मानी जा रही है.
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