मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी और बारिश के बीच पानी में समा गया. इस हादसे में अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. हालांकि, अभी भी 9 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं. रेस्क्यू टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी है, लेकिन इस हादसे ने प्रशासन और पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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क्षमता से अधिक यात्री और टिकटों का खेल
हादसे के बाद जो सबसे चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, वह क्रूज में सवार लोगों की संख्या को लेकर है. बताया जा रहा है कि क्रूज में करीब 43 से 47 लोग सवार थे, जबकि आधिकारिक तौर पर केवल 29 लोगों के ही टिकट कटे थे. यह सीधे तौर पर ओवरलोडिंग का मामला नजर आता है. क्षमता से ज्यादा भार होने के कारण तेज हवाओं के बीच क्रूज का संतुलन बिगड़ना स्वाभाविक था. अगर नियमों का पालन किया जाता और केवल तय संख्या में ही लोग सवार होते, तो शायद क्रूज को नियंत्रित किया जा सकता था.
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लाइफ जैकेट का मुद्दा
हादसे के वक्त सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की बात भी सामने आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रूज पर सवार ज्यादातर यात्रियों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी. नियमानुसार, पानी में उतरने से पहले हर यात्री को सुरक्षा उपकरण पहनाना अनिवार्य है, लेकिन यहां स्टाफ और यात्रियों दोनों की लापरवाही उजागर हुई है. अगर यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी होती, तो डूबने वालों की संख्या काफी कम हो सकती थी. इसके साथ ही, क्रूज की फिटनेस पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह क्रूज साल 2006 में बना था और इसकी नियमित जांच व ऑडिट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
खराब मौसम और प्रशासनिक चूक
हादसे के समय हवा की रफ्तार लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटा थी. जानकारों का मानना है कि एक बड़े क्रूज या मिनी जहाज के लिए इतनी रफ्तार जानलेवा नहीं होनी चाहिए, बशर्ते वह सही स्थिति में हो. सवाल यह भी है कि क्या मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया? किनारे से महज 300 मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ऑपरेशन टीम ने जोखिम का सही आकलन किया था. हालांकि क्रूज के पायलट, जिन्हें 10 साल का अनुभव है, का कहना है कि तूफान इतना अचानक आया कि संभलने का मौका ही नहीं मिला.
सरकार का पक्ष और जांच के आदेश
इस भीषण हादसे पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने संज्ञान लिया है. उन्होंने कहा कि प्राथमिकता अभी लापता लोगों का रेस्क्यू करना है. इसके साथ ही उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं ताकि यह साफ हो सके कि हादसा वास्तव में प्राकृतिक आपदा थी या किसी की लापरवाही का परिणाम. फिलहाल शुक्रवार सुबह से एसडीआरएफ और रेस्क्यू टीमें दोबारा सर्च ऑपरेशन में जुट गई हैं ताकि लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके.
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