jabalpur cruise accident: मौत को मात देकर लौटे 70 साल के रियाज हुसैन की कहानी रौंगटे खड़ी कर देगी, पानी में 3 घंटे लटके रहे और फिर ऐसे बचे

जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में मौत को मात देकर लौटे रियाज हुसैन की आपबीती. जानें कैसे डूबते हुए क्रूज के अंदर 3 घंटे तक फंसे रहकर उन्होंने अपनी जान बचाई.

NewsTak
रियाज हुसैन ने बताई क्रूज हादसे की असल कहानी.

पुनीत कपूर

follow google news

Jabalpur news: "जाको राखे साइयां, मार सके न कोय..." यह कहावत जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे से जिंदा बचकर लौटे रियाज हुसैन पर सटीक बैठती है. जब लहरों के बीच क्रूज समा गया और चारों तरफ मौत का सन्नाटा पसर गया, तब रियाज हुसैन तीन घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते रहे. डूबते हुए क्रूज के एक कोने में फंसी अपनी गर्दन और ऊपर बची चंद इंच की हवा ने उन्हें मौत के मुंह से वापस खींच लिया. रियाज हुसैन ने MP तक से इस संघर्ष और खौफनाक सच की पूरी कहानी साझा की. 

Read more!

जबलपुर में खमरिया स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में मैनेजर रह चुके 70 वर्षीय रियाज हुसैन 30 अप्रैल की शाम को बरगी डैम पहुंचे. उनके साथ पत्नी रेशमा (65), समधन शमीम नकवी (65) और 13 साल का नाती जफर था. रियाज हुसैन ने क्रूज पर जाने का प्लान बनाया और लोअर डेक के 4 टिकट खरीदे. सभी शाम 5 बजे क्रूज पर सवार हो गए. क्रजू पर म्यूजिक चल रहा था. सभी खुश थे. सेल्फी ले रहे थे. फैमिली की तस्वीरें मोबाइल में क्लिक कर रहे थे और वीडियो बना रहे थे. आधे घंटे तक सब ठीक था. अचानक तेज तूफानी हवाएं चलने लगीं. 

पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं. क्रूज डगमगाने लगा. पायलट ने करीब एक घंटे तक खूब संघर्ष किया कि क्रूज को किनारे तक ले जाया जा सके, लेकिन कुदरत के आगे मशीन ने जवाब दे दिया. क्रूज बंद हो गया और उसमें पानी भरना शुरू हो गया. पहले लाइफ जैकेट नहीं दिए गए थे. अचानक क्रूज हिलने लगा तो लाइफ जैकेट दिए गए. क्रूज पर बचाओ-बचाओं का शोर-शराबा था. लोग डर गए थे. महिलाएं और बच्चे चिल्ला रहे थे. अचानक क्रूज डूब गया. कुछ पल तक शोर सुनाई दिया फिर शांति ही शांति थी. बस हवाएं और लहरों की आवजें थीं. दूर-दूर तक कोई सुनने वाला न था.

क्रूज पलट गया और रियाज उसके भीतर 3 घंटे फंसे रहे 

हादसे के वक्त क्रूज में मौजूद रियाज हुसैन ने बताया कि क्रूज पलट गया था और वो उसके नीचे थे. पानी बढ़ता जा रहा रहा था. जब पानी गले तक आ गया, तो वे अपनी जान बचाने के लिए हाथ-पैर मारने लगे. अंधेरे और डूबते जहाज के बीच उन्हें एक छोटा सा 'होल' (छेद) दिखा, जो ऊपर की तरफ खुलता था. वे क्रूज के एक कोने में बने ट्रायंगल (त्रिकोणीय) हिस्से में फंस गए. गनीमत यह थी कि वहां उनकी गर्दन के ऊपर कुछ जगह खाली जगह थी, जहां से वे सांस ले पा रहे थे. रियाज एक लोहे का एंगल पकड़कर करीब 3 घंटे तक इसी स्थिति में फंसे रहे. रियाज अहमद ने बताया कि लोअर डेक में पत्नी और समधन थीं. दोनों को अपनी आंखों के सामने डूबते हुए देखा. तब उन्हें पता ही नहीं कि जफर कहां है.  

अंधेरे में आई आवाजें और फिर मिला 'तिनके का सहारा' 

रियाज ने बताया कि वे फंसे रहे और चिल्लाते रहे पर दूर-दूर तक कोई सुनने वाला नहीं था. इसी बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन की आवाजों ने पुकारा- "घबराओ मत, हम आ गए हैं," तब उनकी उम्मीद जागी. बचाव दल ने सब्बल, कुल्हाड़ी और हथौड़ों की मदद से क्रूज की बॉडी को काटना शुरू किया. इस काम में करीब एक से दो घंटे का समय लगा, और आखिरकार रियाज को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. 

भोपाल के नामी स्किन डॉक्टर की शर्मनाक करतूत, जयपुर की युवती के बेहद गंभीर आरोप- 'झांसा देकर....फिर अबॉर्शन
 

    follow google news