जबलपुर के बर्गी डैम में हुए क्रूज हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. इस भयानक हादसे में कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, जिनमें से एक रियाज हुसैन भी थे. रियाज हुसैन उन खुशनसीब लोगों में से हैं, जो मौत को मात देकर सुरक्षित बाहर निकल आए हैं. करीब तीन घंटे तक पानी में डूबे क्रूज के अंदर फंसे रहने के बाद उन्हें बचा लिया गया. रियाज ने हादसे के उन खौफनाक पलों को याद करते हुए बताया कि कैसे एक सुखद सैर अचानक चीख-पुकार और अंधेरे में बदल गई.
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अचानक बदला मौसम और उठने लगी लहरें
रियाज हुसैन के मुताबिक, शुरुआत में सब कुछ सामान्य था और क्रूज अपनी गति से चल रहा था. करीब आधे-पौन घंटे की सैर के बाद अचानक मौसम बदला, बादल छा गए और तेज आंधी चलने लगी. आंधी की वजह से डैम के पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं और नाव बुरी तरह हिलने लगी. क्रूज के पायलट ने स्थिति को भांपते हुए लगभग एक घंटे तक पूरी कोशिश की कि वह क्रूज को सुरक्षित किनारे तक ले जाए, लेकिन लहरों के सामने उसकी कोशिशें नाकाम रहीं. सुरक्षा के लिहाज से पायलट ने सभी पर्यटकों को पहले ही लाइफ जैकेट पहना दी थी.
क्रूज बंद हुआ और भरने लगा पानी
जैसे-जैसे लहरें तेज हुईं, क्रूज का इंजन अचानक बंद हो गया. इंजन बंद होते ही बड़ी-बड़ी लहरें क्रूज के अंदर समाने लगीं और देखते ही देखते पानी क्रूज के निचले हिस्से में भर गया. पानी भरने के साथ ही वहां अंधेरा छा गया और लोगों की चीखें बंद होने लगीं. रियाज बताते हैं कि उस वक्त ऐसा सन्नाटा छा गया था कि उन्हें लगा अब सब खत्म हो गया है. वे करीब दो से तीन घंटे तक उस अंधेरे और पानी के बीच शांत बैठे रहे, उन्हें पूरी उम्मीद हो चली थी कि वे अब नहीं बचेंगे और डूब चुके हैं.
मौत के बीच तीन घंटे का संघर्ष
हादसे के वक्त रियाज हुसैन के साथ उनका परिवार भी मौजूद था. रियाज ने बताया कि पानी भरते ही वे एक कोने में फंस गए थे. जब पानी उनके गले तक आ गया, तो उन्होंने बचने के लिए हाथ-पैर मारे और क्रूज के ऊपरी हिस्से में बने एक त्रिकोणीय पोर्शन के पास पहुंचे. वहां एक छोटा सा छेद था, जहां से उन्हें सांस लेने की जगह मिल रही थी. वे बताते हैं कि उनकी गर्दन के ऊपर बस उतनी ही जगह बची थी जहाँ से वे सांस ले पा रहे थे. इसी स्थिति में वे घंटों तक फंसे रहे और भगवान से प्रार्थना करते रहे.
बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद निकाला
रियाज ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए प्रशासन और स्थानीय लोग पहुंचे. बचाव दल के पास सबबल, कुल्हाड़ी और हथौड़े थे, जिनसे वे क्रूज की बॉडी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. क्रूज को तोड़ना काफी मुश्किल था और इसमें करीब एक से दो घंटे का समय लग गया. इस दौरान बचाव दल लगातार उन्हें आवाजें दे रहा था कि 'घबराओ मत, हम आ गए हैं', जिससे रियाज को हिम्मत मिली और वे भी अंदर से लगातार जवाब देते रहे. अंततः कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया.
परिवार के दो सदस्य अभी भी लापता
इस हादसे में रियाज हुसैन तो बच गए, लेकिन उनका परिवार अब भी बिखरा हुआ है. रियाज ने बताया कि उनका एक बच्चा जाफर किसी तरह झटके से बाहर निकल गया था और वह सुरक्षित है. हालांकि, उनकी पत्नी और समधन का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है. रियाज जब बाहर निकले, तब तक उनकी तलाश जारी थी. यह हादसा रियाज के लिए किसी बुरे सपने जैसा है, जहां उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपनों को बिछड़ते और खुद को मौत के बेहद करीब देखा.
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