मध्य प्रदेश के देवास जिले के ग्राम टोकला में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में आज दोपहर एक भीषण विस्फोट हुआ. इस दर्दनाक हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है.
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बम स्क्वाड का बड़ा खुलासा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन से बम स्क्वाड (BDS) की टीम को मौके पर बुलाया गया. जांच का नेतृत्व कर रहे दिनेश यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फैक्ट्री के अंदर भारी मात्रा में 'लो एक्सप्लोसिव' (पटाखों में इस्तेमाल होने वाला बारूद) पाया गया है. उन्होंने संकेत दिया कि हाईवे के नजदीक और रिहायशी क्षेत्र के पास इतनी बड़ी मात्रा में बारूद का स्टॉक नहीं होना चाहिए था.
लापरवाही और लाइसेंस का खेल
पुलिस प्रशासन के अनुसार, फैक्ट्री का संचालन अनिल मालवीय (निवासी पीपल रवा) द्वारा किया जा रहा था. संचालक के पास 15-15 किलोग्राम क्षमता के निर्माण लाइसेंस और 500 किलोग्राम के दो स्टॉक लाइसेंस थे. हालांकि, मौके के हालात और विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए यह माना जा रहा है कि फैक्ट्री में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बारूद डंप किया गया था.
विस्फोट का कारण
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में काम के दौरान बारूद से निकली एक चिंगारी ने भीषण आग का रूप ले लिया, जिससे पूरी फैक्ट्री धमाकों की गूंज से दहल उठी. प्रशासन अब संचालक के राजनीतिक संबंधों और लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन की बारीकी से जांच कर रहा है.
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