आस्था या बर्बादी? MP के सीहोर में 11 हजार लीटर दूध से हुआ मां नर्मदा का अभिषेक, वीडियो वायरल होते ही छिड़ी बहस

मध्य प्रदेश के सीहोर में एक 21 दिवसीय अनुष्ठान के समापन पर मां नर्मदा का 11,000 लीटर दूध से अभिषेक किया गया. इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग आस्था और दूध की बर्बादी को लेकर आपस में भिड़ गए हैं.

मध्य प्रदेश
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आकांक्षा ठाकुर

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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से मां नर्मदा के दुग्धाभिषेक की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. सीहोर के सातदेव स्थित प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर मां नर्मदा का 11,000 लीटर दूध से अभिषेक किया गया. इस दुग्धाभिषेक का वीडियो अब इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है. 

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21 दिवसीय महायज्ञ का हुआ समापन

दरअसल, सीहोर की भेरुंदा तहसील के सातदेव क्षेत्र में पिछले 21 दिनों से एक विशाल धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था. संत शिवानंद महाराज के सानिध्य में आयोजित इस महायज्ञ में रोजाना 21 क्विंटल हवन सामग्री का उपयोग किया गया. 18 मार्च से शुरू हुए इस अनुष्ठान के अंतिम दिन मां नर्मदा का दूध के टैंकरों से अभिषेक किया गया. बताया जा रहा है कि पूरे आयोजन के दौरान करीब 41 टन हवन सामग्री और जड़ी-बूटियों के साथ सोना-चांदी की आहुतियां भी दी गईं.

सोशल मीडिया पर बंटी यूजर्स की राय

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं:

भक्ति और श्रद्धा: कई लोग इस दृश्य को देखकर अभिभूत हैं और इसे आस्था का सर्वोच्च रूप बता रहे हैं. उनका मानना है कि मां नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी और देवी माना जाता है, इसलिए यह अभिषेक उनकी महिमा का प्रतीक है.

वेस्टेज पर सवाल: दूसरी ओर, कई यूजर्स इस पर नाराजगी जता रहे हैं. उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध को नदी में बहाने के बजाय गरीबों या जरूरतमंद बच्चों में बांटा जा सकता था. यूजर्स इसे संसाधनों की बर्बादी बता रहे हैं.

सप्त ऋषियों की तपोभूमि है 'सातदेव'

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सातदेव क्षेत्र सप्त ऋषियों की प्राचीन तपोभूमि है. कहा जाता है कि यहाँ ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों ने कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव 'पातालेश्वर महादेव' के रूप में प्रकट हुए थे. ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र गोंड शासकों और बाद में देवी अहिल्याबाई होलकर के निर्माण कार्यों के कारण काफी महत्व रखता है.

मध्य प्रदेश में मां नर्मदा को केवल नदी नहीं बल्कि साक्षात देवी माना जाता है. यही कारण है कि यहाँ के लोगों में उनके प्रति गहरी आस्था है, लेकिन 11 हजार लीटर दूध के उपयोग ने अब एक नई सामाजिक और धार्मिक चर्चा को जन्म दे दिया है.

 

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