पर्यटकों को लुभा रहा महाकाल लोक! श्रद्धालुओं को यूरोप के नजारे इसके आगे लगे फीके

संदीप कुलश्रेष्ठ

20 Dec 2023 (अपडेटेड: Dec 20 2023 6:12 AM)

महाकाल लोक देखकर मंत्रमुग्ध हुए पर्यटकों को इसकी सुंदरता के आगे विदेशों के नजारे फीके नजर आ रहे हैं. र्यटकों की संख्या इस बात को इंगित करती है ये अब पर्यटन की राह पर आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है.

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Ujjain News: विदेशों की अपेक्षा भारत के कई शहर पर्यटन की दृष्टि से लोगों को बहुत ही लुभा रहे हैं, इसमें शामिल है बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन. उज्जैन में बढ़ती श्रद्धालु और पर्यटकों की संख्या इस बात को इंगित करती है ये अब पर्यटन की राह पर आगे बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. महाकाल लोक देखकर मंत्रमुग्ध हुए पर्यटकों को इसकी सुंदरता के आगे विदेशों के नजारे फीके नजर आ रहे हैं.

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महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बाबा महाकाल के दर्शन करने और महाकाल लोक देखने के लिए पहुंच रहे हैं. महाकाल लोक में बनाई गईं कलाकृतियां और आकर्षक मूर्तियां उज्जैन शहर सहित प्रदेश और देश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. भव्य महाकाल लोक के नजारे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है.

यूरोप से ज्यादा सुंदर महाकाल लोक

झारखंड से आए श्रद्धालु तनय शंकर का कहना है कि महाकाल का मैंने बहुत नाम सुना था और जितना नाम सुना था उससे अधिक सुंदर इसे पाया. अभी मैं जुलाई महीने में यूरोप भी गया था, इतना सुंदर और आलौकिक दृश्य मुझे वहां भी नहीं नजर आया. मैं तो चाहूंगा कि हमारे देश के लोग विदेश जाने की बजाय वहां पर जाने में जो खर्च करते हैं उसकी बजाय यहां आकर हम अपने देश में ही घूमें.

बहुत सुना था, देखा तो पता चला

सूरत से आई दर्शनार्थी विश्वा पटेल का कहना है कि इंडिया में रहते हुए और इंडियन होते हुए मैं यहां घूमने नहीं आ पाई थी महाकाल में. मैंने महाकाल लोक के बारे में बहुत सुना लेकिन, आज देखा तो पता चला कि सच में शिव जी यहां पर ही विराजमान हैं. यहां जो शांति है वह शायद पूरे भारत में अगर केदारनाथ के अलावा महाकाल लोक में ही है.

विदेशों की बजाय घूमें भारत

महाकाल लोक आए श्रद्धालुओं से जब छुट्टियों में घूमने को लेकर उनकी पसंद के बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि भारतवासियों को विदेश घूमने जाने की बजाय अपने ही भारत में छुट्टियां मनाना चाहिए. हमारे भारत में ही कई ऐसे दार्शनिक और पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में हमें जानना चाहिए और आने वाली पीढ़ी को भी बताना चाहिए, जिससे वह हमारी संस्कृति और भारत की पहचान को समझ सकें और उसे आगे बढ़ा सकें.

अब देशवासी दूर-दूर से महाकाल मंदिर और महाकाल लोक घूमने के लिए उज्जैन में आते हैं. पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उज्जैन पर्यटन के रूप में अपनी एक अलग पहचान कायम करेगा.

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