Datiya By-Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए जैसे ही बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा वैसी ही यहां सियासी भूचाल आ गया. टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्काजाम कर दिया, वहीं बीजेपी जिला अध्यक्ष और सभी पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा सौंपकर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया. दतिया में मचे इस बगावत के बीच आखिरकार नरोत्तम मिश्रा खुद सामने आए हैं और उन्होंने अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया है.
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चारों तरफ फैले तनाव को देखते हुए नरोत्तम मिश्रा ने बेहद सधे और गंभीर अंदाज में अपने समर्थकों से शांति की अपील की है. उन्होंने कार्यकर्ताओं के इस उग्र प्रदर्शन से खुद को अलग करते हुए संगठन के अनुशासन की बात दोहराई.
गुस्सा दिखाने के लिए पार्टी का मंच होता है, सड़कें नहीं
नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों और नाराज कार्यकर्ताओं को शांत रहने की हिदायत देते हुए कहा:
"मैं अपने सभी कार्यकर्ताओं से हाथ जोड़कर यह गुजारिश करूंगा कि वे ऐसा कोई भी काम न करें जिससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था भंग हो. रास्ते रोकना या इस तरह से अपना आक्रोश व्यक्त करना सही तरीका नहीं है. राजनीति और संगठन में अपनी बात रखने के लिए पार्टी के भीतर एक तय फोरम (मंच) होता है, बातें वहीं रखी जाती हैं। इस तरह सड़कों पर गुस्सा नहीं दिखाया जाता."
उन्होंने साफ तौर पर इसे हाईकमान का फैसला बताते हुए आगे कहा, "मैंने कल भी इस विषय पर विस्तार से बात की थी और आज भी अपनी उसी बात पर कायम हूं कि यह पूरी तरह से पार्टी का निर्णय है. मेरी सभी से अपील है कि कृपया संयम बरतें और शांति बनाए रखें."
क्या थम जाएगी बगावत?
नरोत्तम मिश्रा का यह बयान बेहद अहम समय पर आया है. एक तरफ जहां उनके वफादार नेताओं ने सामूहिक इस्तीफे देकर आलाकमान की नींद उड़ा दी है, वहीं नरोत्तम मिश्रा की इस 'शांति अपील' को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
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