MP मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव के संकेत: कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह की कुर्सी पर संकट? अटकलों का बाजार गर्म

Kailash Vijayvargiya news: मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. कैलाश विजयवर्गीय का नाम गणतंत्र दिवस झंडारोहण सूची से गायब होने और विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली कड़ी फटकार के बाद सियासी अटकलें तेज हो गई हैं. क्या मोहन यादव सरकार में दो कद्दावर मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है? संभावित कैबिनेट विस्तार, अंदरूनी सियासी खींचतान और नए चेहरों की एंट्री को लेकर एमपी की राजनीति में हलचल मची हुई है.

MP minister controversy
कैलाश विजयवर्गीय

आशुतोष शुक्ला

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मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल की आहट सुनाई दे रही है. सूबे के दो कद्दावर मंत्रियों कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं. गणतंत्र दिवस के झंडारोहण की सूची से कैलाश विजयवर्गीय का नाम गायब होने और विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली फटकार के बाद, मंत्रिमंडल विस्तार में इनके पत्ता कटने की चर्चा जोरों पर है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.

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कैलाश विजयवर्गीय का झंडारोहण लिस्ट से नाम गायब

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी गणतंत्र दिवस पर झंडारोहण करने वाले मंत्रियों की सूची में वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम शामिल नहीं है. हालांकि, उनकी ओर से एक विज्ञप्ति जारी कर बताया गया है कि परिवार में एक सदस्य के निधन के कारण वे 10 दिनों के अवकाश पर हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले और पत्रकारों पर उनके 'घंटा और फोकट' वाले विवादित बयान से जोड़कर देख रहे हैं. चर्चा है कि आलाकमान उनके बयानों से नाराज है.

विजय शाह की कुर्सी पर 'सुप्रीम' संकट

कैबिनेट मंत्री विजय शाह की मुश्किलें और भी गंभीर नजर आ रही हैं. आर्मी ऑफिसर सोफिया कुरैशी पर दिए गए उनके पुराने विवादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने एसआईटी (SIT) रिपोर्ट के बावजूद अब तक कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की तल्खी के बाद सरकार के पास विजय शाह को पद से हटाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है, ताकि कोर्ट में और किरकिरी न हो.

मोहन यादव बनाम कैलाश विजयवर्गीय

वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश की राजनीति में 'मोहन यादव बनाम कैलाश विजयवर्गीय' की अंदरूनी जंग अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है. इंदौर, जो कभी पूरी तरह कैलाश विजयवर्गीय के वर्चस्व में था, वहां अब मुख्यमंत्री मोहन यादव का प्रभाव बढ़ रहा है. विजयवर्गीय का अपने प्रभार वाले जिले धार (जो फिलहाल भोजशाला विवाद के कारण बेहद संवेदनशील है) में न जाना और लंबी छुट्टी पर रहना कई सवाल खड़े करता है. इसे उनके राजनीतिक कद में आई गिरावट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और नए चेहरे

चर्चा है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में डॉ. मोहन यादव अपनी टीम में बड़े बदलाव कर सकते हैं. चार मंत्रियों के पद पहले से खाली हैं, और खराब परफॉर्मेंस या विवादों में रहने वाले मंत्रियों की छुट्टी कर युवाओं और महिलाओं को मौका दिया जा सकता है. गोपाल भार्गव और अजय विश्नोई जैसे वरिष्ठों की वापसी या फिर पूरी तरह नए चेहरों की लॉटरी लग सकती है. हालांकि, अंतिम फैसला दिल्ली से ही तय होगा. फिलहाल, मध्य प्रदेश की राजनीति में वेट एंड वॉच की स्थिति बनी हुई है. देखना यह है कि क्या 26 जनवरी के बाद एमपी कैबिनेट की तस्वीर वाकई बदल जाती है.

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