कैलाश विजयवर्गीय के साथ बड़ा खेल? झंडा फहराने वाली लिस्ट से नाम कटा, 10 दिन की छुट्टी पर गए मंत्री जी
Kailash Vijayvargiya news: मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम 26 जनवरी के झंडा फहराने वाले कार्यक्रम की आधिकारिक सूची से गायब होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच उनके 10 दिन की छुट्टी पर जाने की खबर ने अटकलों को और हवा दे दी है. जानिए पूरी कहानी, राजनीतिक संकेत और इसके मायने.

मध्य प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर होने वाले झंडा फहराने वाले कार्यक्रम की आधिकारिक सूची से उनका नाम गायब होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विजयवर्गीय हाल ही में इंदौर में हुए 'दूषित जल कांड' और अपने विवादास्पद बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं. आइए समझते हैं पूरी बात.
झंडारोहण की लिस्ट से गायब हुआ नाम
मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने के लिए मंत्रियों की सूची जारी की है. इस पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा समेत तमाम मंत्रियों के नाम हैं, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय का नाम कहीं नहीं है. उनके प्रभार वाले जिलों धार और सतना में अब कलेक्टर झंडा फहराएंगे, जबकि इंदौर में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा को यह जिम्मेदारी दी गई है.
10 दिन की लंबी छुट्टी पर गए विजयवर्गीय
झंडा फहराने की सूची से नाम गायब होने के बीच कैलाश विजयवर्गीय के विभाग की ओर से एक और पत्र सामने आया है. इसमें बताया गया है कि परिवार के एक सदस्य के निधन के कारण विजयवर्गीय 10 दिन के अवकाश पर रहेंगे. हालांकि, राजनीतिक जानकार इसे महज इत्तेफाक नहीं मान रहे हैं. हाल के दिनों में कैबिनेट बैठकों से उनकी दूरी और अधिकारियों के रवैये को लेकर उनके शिकायती बयानों ने सरकार के साथ उनकी कथित नाराजगी की खबरों को हवा दी है.
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दूषित जल कांड और विवादों का साया
कैलाश विजयवर्गीय की मुश्किलें उनके विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 के भागीरथपुरा में हुई जल त्रासदी के बाद बढ़ गई हैं. यहां दूषित पानी पीने से 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. इसके अलावा, एक पत्रकार के साथ बातचीत के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर भी वे चौतरफा घिरे हुए हैं. इंदौर जैसे अपने गढ़ में ही झंडा फहराने न कर पाना उनके सियासी रसूख पर भी सवाल उठा रहा है.
क्या सरकार ने बना ली है दूरी?
मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या पार्टी और सरकार ने विजयवर्गीय से किनारा करना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनके कुछ हालिया सार्वजनिक संवादों में भी कड़वाहट या दूरी साफ देखी गई थी. अब 10 दिनों के अवकाश के बाद विजयवर्गीय की वापसी और उनकी सक्रियता ही यह तय करेगी कि मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर चल रहा यह 'शीतयुद्ध' किस दिशा में मुड़ता है.
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