मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के युवाओं के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं. पुलिस विभाग के एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए सीएम ने जहां इंदौर पुलिस को 50 स्पेशल बाइक की सौगात दी और उनके सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की, वहीं सरकारी नौकरियों में पदोन्नति (Promotions) और नई भर्तियों (New Recruitments) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. सीएम की इन घोषणाओं में सबसे प्रमुख निर्णय स्पेशल एमपी पीएससी (MPPSC) परीक्षा को लेकर रहा.
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2027 'युवा वर्ष', जनवरी-फरवरी में स्पेशल MPPSC
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आने वाला साल प्रदेश के युवाओं के लिए बेहद खास रहेगा, क्योंकि सरकार अगले साल यानी 2027 को 'युवा वर्ष' के रूप में मनाएगी. इसी के तहत जनवरी-फरवरी में स्पेशल पीएससी परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य सभी खाली पदों को भरना है ताकि कोई भी पद रिक्त न रहे.
85 हजार पदों पर नियुक्तियों का रोडमैप
सरकारी विभागों में भर्तियों और पदोन्नति पर बात करते हुए सीएम ने निम्नलिखित प्रमुख आंकड़े सामने रखे:
- प्रदेश में कुल 85 हजार पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
- पुलिस महकमे में 18,500 पदों पर भर्ती का फैसला लिया गया है.
- अगले दो सालों के भीतर पुलिस विभाग के 22,500 अन्य खाली पदों को भी भरा जाएगा.
स्पेशल PSC बनाम नियमित PSC: क्या हैं तकनीकी चुनौतियां?
सामान्य तौर पर राज्य सेवा (PSC) परीक्षा का विज्ञापन दिसंबर में जारी होता है, जिसके बाद फरवरी-मार्च में प्री, जुलाई-अगस्त में मेंस और अक्टूबर-नवंबर में इंटरव्यू आयोजित कर दिसंबर तक परिणाम देने का लक्ष्य रखा जाता है. हालांकि, कानूनी अड़चनों के कारण अक्सर इस प्रक्रिया में करीब डेढ़ साल का समय लग जाता है.
सीएम के ऐलान के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि पहले स्पेशल पीएससी होगी या नियमित पीएससी. जानकारों के मुताबिक
- स्पेशल पीएससी कराने के लिए सभी विभागों से दोबारा रिक्त पदों की जानकारी जुटानी होगी.
- इसके बाद वित्त विभाग से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा.
- इस प्रक्रिया के चलते स्पेशल पीएससी की प्री परीक्षा जुलाई-अगस्त तक और मेंस परीक्षा साल के अंत तक खिंच सकती है.
OBC आरक्षण बना सबसे बड़ा रोड़ा
इन तमाम भर्ती घोषणाओं के बीच ओबीसी (OBC) आरक्षण का मुद्दा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है
- हाईकोर्ट द्वारा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण कानून को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद, फिलहाल सरकार के पास 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर विज्ञापन निकालने का विकल्प है. हालांकि, इससे ओबीसी वर्ग में नाराजगी का जोखिम है.
- यदि सरकार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण (या पूर्व की तरह 87-13 फीसदी फॉर्मूले) के साथ भर्तियां जारी रखना चाहती है, तो उसे हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे (रोक) के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना होगा.
ऐसे में नई भर्तियों के विज्ञापन जारी करने पर भले ही कोई कानूनी रोक न हो, लेकिन परीक्षा प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सरकार को सबसे पहले इस आरक्षण विवाद का समाधान खोजना होगा.
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