मध्य प्रदेश कांग्रेस में पिछले कुछ समय से मचे अंदरूनी घमासान को लेकर अब पार्टी आलाकमान सख्त रुख अपनाने जा रहा है. लगातार हो रही बयानबाजी और सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं को निशाने पर लेने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जल्द ही बड़ी गाज गिर सकती है. सूत्रों के मुताबिक ऐसे अनुशासनहीन नेताओं की एक 'ब्लैक लिस्ट' तैयार की जा रही है, जिन्हें जल्द ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है.
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हाल ही में इंदौर के कांग्रेस नेता राकेश यादव पर हुई कार्रवाई तो महज एक शुरुआत है. मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने संगठन से शिकायत की है कि कुछ नेता और कार्यकर्ता गाहे-बगाहे सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर शीर्ष नेतृत्व को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. वे राज्य में कांग्रेस की कमजोरी के लिए बड़े नेताओं को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लगातार अपनों के ही निशाने पर रहे हैं. हद तो तब हो गई जब प्रभारी हरीश चौधरी पर पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल तक ने गंभीर आरोप लगा दिए. पार्टी अब इसे 'गंभीर अनुशासनहीनता' मानकर चल रही है.
जमीन विवाद और दतिया ट्रेन सफर की इनसाइड स्टोरी
हाल ही में वीर भारत न्यास को दी गई भूमि के मामले को लेकर जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बीच तल्खी की खबरें आई थीं. इस मुद्दे पर पीएसी (PAC) की बैठक में भी जमकर हंगामा हुआ और बात दिल्ली आलाकमान तक पहुंच गई. इसके बाद दोनों नेताओं को न सिर्फ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी, बल्कि एकजुटता दिखाने के लिए शनिवार को दतिया उपचुनाव की घोषणा के बाद दोनों नेता एक ही ट्रेन के एक ही कोच में सवार होकर दतिया पहुंचे.
2028 चुनाव के लिए 'करो या मरो' की रणनीति
कांग्रेस पार्टी साल 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को 'करो या मरो' के मुकाबले के रूप में देख रही है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसे मजबूत और अनुशासित संगठन से मुकाबला करने के लिए पहले कांग्रेस को अपने घर की लड़ाई को शांत करना होगा. चुनाव मैदान में उतरने से पहले पार्टी की छवि को धूमिल करने वाले तत्वों पर लगाम लगाना अब बेहद जरूरी हो गया है.
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