मध्य प्रदेश की सरकार अपने खाली खजाने को भरने के लिए राज्य के बाहर मौजूद हेरिटेज प्रॉपर्टी को लीज पर देने की योजना पर आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में राज्य सरकार ने मुंबई के पॉश कोलाबा इलाके में स्थित अपनी 117 साल पुरानी हेरिटेज प्रॉपर्टी, 'एडवर्ड विला' से कमाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह प्रॉपर्टी वर्तमान में एमपी सरकार के वीवीआईपी गेस्ट हाउस के तौर पर इस्तेमाल हो रही है. इससे कमाई करने के लिए इसके बचे हुए लीज अधिकारों को बेचा या ट्रांसफर किया जा सकता है.
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9 कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी
मिली जानकारी के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में कम से कम नौ कंपनियों ने सरकार से संपर्क किया है और इस सौदे के लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर बनने में दिलचस्पी दिखाई है. सरकार ने इसके लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने के वास्ते प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं. सरकार का कहना है कि इस प्रॉपर्टी की कीमत बहुत अधिक है और इसे भुनाने में कई तकनीकी, कानूनी, वित्तीय और व्यावसायिक जटिलताएं शामिल हैं. इसलिए एक विशेष ट्रांजैक्शन एडवाइजर की जरूरत है, जो सौदे के लिए सही रणनीति सुझा सके, बोली लगाने की प्रक्रिया को संभाले तथा जरूरी सरकारी मंजूरियों, कानूनी नियमों के पालन और कागजी कार्रवाई में मार्गदर्शन दे सके.
1909 में हुआ था निर्माण और इतिहास
मुंबई के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, नरीमन पॉइंट के पास कोलाबा (कफ परेड, ससून डॉक के पास कैप्टन प्रकाश पेठे मार्ग) में स्थित एडवर्ड विला को मूल रूप से 1909 में बनवाया गया था. यह दक्षिण मुंबई के नेवी कैंटोनमेंट इलाके में आती है, जो देश की आर्थिक राजधानी की सबसे प्रमुख जगहों में से एक है.
यह ऐतिहासिक इमारत मूल रूप से वर्ष 1909 में इंदौर के तत्कालीन होलकर राजवंश (महाराजा शिवाजीराव होलकर या उनके शासनकाल/रियासत से जुड़े प्रबंधनों) द्वारा बनवाई गई थी. ब्रिटिश काल के दौरान रियासतों के राजा-महाराजाओं का मुंबई आना-जाना लगा रहता था, इसलिए इसे उनके आवास या संपत्ति के रूप में तैयार किया गया था. वर्तमान में यह एक हेरिटेज बिल्डिंग (धरोहर इमारत) घोषित है. इस विला का नामकरण ब्रिटिश सम्राट किंग एडवर्ड सप्तम के नाम पर किया गया था, क्योंकि उस समय ब्रिटिश वफादारी या प्रभाव के तहत कई प्रमुख इमारतों और परिसरों के नाम ब्रिटिश राजाओं के नाम पर रखने की परंपरा थी.
स्वामित्व और लीज व्यवस्था
स्वतंत्रता के बाद जब तमाम रियासतों का भारतीय संघ में विलय हुआ और राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तो होलकर रियासत की कई संपत्तियां प्रशासनिक नियंत्रण के तहत प्रशासनिक इकाइयों के पास आ गईं. औपचारिक रूप से यह संपत्ति मध्य प्रदेश सरकार के उपक्रम 'प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड' के अधीन आती है.
बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) से जुड़ी इस जमीन की मूल 99 वर्षों की लीज 11 मार्च 1911 को शुरू हुई थी जो 2005 में समाप्त हो गई थी. इसके बाद बीएमसी और मध्य प्रदेश सरकार के बीच इसे नए सिरे से व्यवस्थित किया गया. वर्तमान में यह 13 नवंबर 2012 से 13 नवंबर 2035 तक (30 साल की लीज अवधि के अनुबंध के अंतर्गत) मध्य प्रदेश सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण और उपयोग में है. लंबी अवधि तक इसका उपयोग मध्य प्रदेश सरकार के वीवीआईपी गेस्ट हाउस के रूप में होता रहा है.
मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, प्रॉपर्टी की कीमत तय करते समय कई बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे कि लीज की बची हुई अवधि, इमारत का हेरिटेज दर्जा और इस प्रॉपर्टी से जुड़े कुछ लंबित कानूनी मामले. अब मध्य प्रदेश सरकार अपने वित्तीय संसाधनों को जुटाने के लिए इस बहुमूल्य हेरिटेज प्रॉपर्टी के बचे हुए लीजहोल्ड अधिकारों को मुद्रीकृत (Monetize) करने या निजी हाथों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है.
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