मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले मां हत्याकांड में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित कानूनी मोड़ आ गया है. अपनी ही गोद लेने वाली मां की बेरहमी से हत्या कर लाश को घर की दीवार के अंदर दफन करने वाले आरोपी बेटे की फांसी की सजा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि इस केस के दो सबसे महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करते समय एक ऐसी कानूनी चूक हुई, जिसने पूरे फैसले को ही पलट कर रख दिया. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी बरी हो गया है, बल्कि अब इस मामले में नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया चलेगी.
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आखिर क्यों रद्द हुई फांसी की सजा?
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि मामले के दो बेहद खास गवाहों- संजय दत्त शर्मा और रामबाबू शर्मा के बयान जब ट्रायल कोर्ट में दर्ज किए जा रहे थे, तब वहां न तो आरोपी मौजूद था और न ही उसका वकील. हाईकोर्ट ने इसे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 273 का सीधा उल्लंघन माना. अदालत ने साफ कहा कि आरोपी या उसके वकील की गैर-मौजूदगी में गवाही लेना 'निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार' का हनन है. चूंकि यह एक ऐसी तकनीकी कमी है जिसे सुधारा जा सकता है, इसलिए अदालत ने फांसी की सजा को निरस्त करते हुए दोनों गवाहों के बयान दोबारा दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
क्या था वह खौफनाक मर्डर केस?
यह पूरी वारदात 6 मई 2024 की है, जिसने पूरे श्योपुर को हिलाकर रख दिया था. कोतवाली थाना इलाके में रहने वाले आरोपी दीपक पचौरी की नजर अपनी दत्तक मां ऊषा देवी के बैंक खाते और उनकी 32 लाख रुपये की एफडी (Fixed Deposit) पर थी. इस रकम को हासिल करने के लिए उसने एक खौफनाक साजिश रची. मई को दीपक ने सबसे पहले अपनी मां ऊषा देवी को सीढ़ियों से नीचे धक्का दे दिया. जब वह बच गईं तो उसने लोहे की रॉड से उन पर ताबड़तोड़ हमला किया और आखिर में साड़ी से गला घोंटकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.
हत्या करने के बाद सबूत मिटाने के लिए दीपक ने घर के अंदर ही ईंट, सीमेंट और रेत की मदद से एक नई दीवार खड़ी की और मां की लाश को उसी में चिनवा दिया. शातिर आरोपी ने खुद को बेकसूर दिखाने के लिए 8 मई 2024 को थाने जाकर मां की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी. लेकिन पुलिस की कड़ी पूछताछ में वह टूट गया और उसकी निशानदेही पर दीवार तोड़कर सड़ी-गली लाश बरामद की गई. इस जघन्य अपराध को देखते हुए ट्रायल कोर्ट ने दीपक को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए फांसी (सजा-ए-मौत) मुकर्रर की थी.
अब दोबारा चलेगा मुकदमा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि ट्रायल कोर्ट का पुराना फैसला अब पूरी तरह अमान्य है. दोनों मुख्य गवाहों के बयान अब आरोपी दीपक पचौरी की मौजूदगी में फिर से लिए जाएंगे. कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए बेहद सख्त समय-सीमा (Deadlines) तय की है:
- 24 जुलाई 2026 तक: दोनों गवाहों के बयान दोबारा दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया हर हाल में खत्म करनी होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नया गवाह या नया सबूत केस में शामिल नहीं किया जाएगा.
- 10 अगस्त 2026 तक: केस की अंतिम बहस (Final Arguments) पूरी करनी होगी.
- 25 अगस्त 2026 तक: ट्रायल कोर्ट को इन गवाहियों के आधार पर अपना नया फैसला सुनाना होगा.
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