मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. किसानों के मुद्दों पर आंदोलन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन के साथ हुए टकराव के बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने शनिवार को पुनः कांग्रेस का दामन थाम लिया. पूर्व सांसद नकुलनाथ की मौजूदगी में हुई इस 'घर वापसी' को जिले के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से एक बेहद अहम घटनाक्रम माना जा रहा है.
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कांग्रेस में शामिल होते ही नकुलनाथ ने गमछा पहनाकर अमित सक्सेना का स्वागत किया. पार्टी में लौटते ही सक्सेना ने अपने भाजपा में जाने के पुराने फैसले पर तंज कसते हुए कहा, "विनाश काले विपरीत बुद्धि के चलते मैं भाजपा में गया था."
क्यों हुआ BJP संगठन से टकराव?
अमित सक्सेना की भाजपा से दूरी और कांग्रेस में वापसी की मुख्य वजह किसानों की समस्याएं और संगठन के साथ बढ़ता विवाद बताया जा रहा है. सक्सेना के अनुसार:
योजनाओं का प्रचार बनाम जमीनी मुद्दे: भाजपा की बैठकों में केवल सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर ही जोर दिया जाता था. जब भी वे क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाते, तो उन्हें 'बाद में देखेंगे' कहकर टाल दिया जाता था.
आंदोलन की आजादी का मुद्दा: कांग्रेस में रहते हुए उन्हें किसानों के हक में आवाज उठाने या आंदोलन करने के लिए किसी की अनुमति नहीं लेनी पड़ती थी.
अनुशासनहीनता का नोटिस: भाजपा में शामिल होने के बाद जब उन्होंने किसानों के हक में आंदोलन करने की कोशिश की, तो पार्टी संगठन की ओर से उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस थमा दिया गया.
इसी नोटिस और उपेक्षा से नाराज होकर अमित सक्सेना ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और अपनी पुरानी पार्टी में लौटने का निर्णय लिया.
एक महीने से जारी था विवाद
बताया जा रहा है कि अमित सक्सेना पिछले लगभग एक महीने से किसानों की समस्याओं को लेकर क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे. इसी दौरान उनके और भाजपा संगठन के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे. किसानों के मुद्दों पर आंदोलन करने और उसके बाद मिले अनुशासनहीनता के नोटिस ने इस विवाद को और बढ़ा दिया, जिसके परिणमस्वरूप उन्होंने भाजपा से किनारा कर लिया.
हर किसी की नहीं होगी वापसी: नकुलनाथ
अमित सक्सेना की वापसी पर पूर्व सांसद नकुलनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
"घर वापसी का शुभारंभ छिंदवाड़ा से हुआ है, यह अच्छी बात है... लेकिन कांग्रेस में हर किसी की वापसी नहीं होगी. पार्टी में उन्हीं लोगों को वापस लिया जाएगा, जिन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है."
नकुलनाथ के इस बयान को कांग्रेस छोड़कर अन्य दलों में गए अन्य नेताओं की संभावित वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वापसी के दरवाजे हर किसी के लिए खुले नहीं रहेंगे.
क्या होंगे नए सियासी समीकरण?
छिंदवाड़ा में अमित सक्सेना की घर वापसी के बाद अब नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है. एक तरफ जहां कांग्रेस इसे अपनी मजबूती के तौर पर देख रही है, वहीं अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी वापसी से कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचता है और भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है.
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