कहीं जर्जर छत तो कहीं पशुओं का तबेला... रतलाम के सरकारी स्कूलों का ये कैसा हाल? देखिए ग्राउंड रिपोर्ट

जगत गौतम

• 01:04 PM • 14 Sep 2026

Ratlam School Reality: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. जिले के कासाखारी और छामुंडा प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे जर्जर छतों के नीचे और पशुओं के तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं. शाला उन्नयन अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत की पोल खोलती यह खास ग्राउंड रिपोर्ट.

 जर्जर छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे
जर्जर छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे
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Ratlam Government School Condition: मध्य प्रदेश सरकार भले ही मंचों से स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग और शाला उन्नयन अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन रतलाम जिले से आई तस्वीरें इन दावों की धज्जियां उड़ा रही हैं. रतलाम के आदिवासी अंचल स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर छतों के नीचे और पशुओं के तबेले में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

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जर्जर छत और सूखा नल: कासाखारी स्कूल का बुरा हाल

रतलाम जिले के सैलाना-शिवगढ़ मार्ग पर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय कासाखारी की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बारिश के दिनों में छत टपकती है, जिससे बचने के लिए शिक्षकों ने छत पर तिरपाल बिछा रखी है. कमरे के प्लास्टर उखड़ चुके हैं, सरिया बाहर दिख रहा है और लटकता हुआ पंखा कभी भी गिर सकता है. इस खौफ के साए में कक्षा पहली से पांचवीं तक के करीब 50 बच्चे एक ही कमरे में बैठते हैं.

इतना ही नहीं, जल जीवन मिशन के तहत 2 साल पहले लगाई गई पानी की टंकी खाली पड़ी है. नलों की टोटियां गायब हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. शौचालय में गंदगी का अंबार है. भवन को जर्जर घोषित कर दिया गया है, लेकिन वैकल्पिक स्थान न होने के कारण शिक्षक बच्चों को इसी खतरनाक इमारत में पढ़ाने के लिए विवश हैं.

छामुंडा में पशुओं के तबेले में चल रहा सरकारी स्कूल

कासाखारी से भी बदतर स्थिति शासकीय प्राथमिक विद्यालय छामुंडा की है. जून महीने में पुराना स्कूल भवन जर्जर (डिस्मेंटल) घोषित होने के बाद से यह स्कूल गांव के एक ग्रामीण के पशुओं के तबेले में संचालित हो रहा है. तबेले में एक तरफ पशुओं का भूसा भरा है और गोबर पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ तिरपाल और आड़ लगाकर मासूम बच्चों को पढ़ाया जा रहा है. स्कूल की शिक्षिका टीना यादव के अनुसार, अगर ग्रामीण ने तबेले में जगह नहीं दी होती तो बच्चों को किसी चबूतरे या खुले में बिठाकर पढ़ाना पड़ता.

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शाला उन्नयन अभियान के दावों पर उठे सवाल

रतलाम जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन द्वारा चलाए जा रहे 'शाला उन्नयन और ज्ञानोदय अभियान' के तहत दावा किया गया था कि जिले के 1011 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में 21 हजार से ज्यादा बेंच और डेस्क उपलब्ध कराई गई हैं. लेकिन इस अभियान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शिक्षक संघ का आरोप है कि सरकार से पर्याप्त फंड मिलने के बजाय शिक्षकों से जबरन 1,000 से 5,000 रुपये तक चंदा वसूला गया. संघ ने बिना निविदा प्रक्रिया के सीधे फर्निचर खरीदने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं.

इनपुट: विजय मीणा

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