मध्य प्रदेश में तीन पटवारियों की सेवा समाप्त किए जाने के विरोध में पटवारियों का गुस्सा फूट पड़ा है. इंदौर और उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे 1,000 से अधिक पटवारियों ने भोपाल चौराहे से कलेक्टर कार्यालय तक विशाल रैली निकाली और कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया.
ADVERTISEMENT
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और 3 दिन का अल्टीमेटम
कलेक्ट्रेट परिसर में पटवारियों का धरना करीब एक से डेढ़ घंटे तक चला. प्रदर्शन के दौरान पटवारियों ने कलेक्टर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और 'रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम' का भजन भी गाया.
पटवारी संघ ने मांग की है कि सेवा समाप्त किए गए तीनों पटवारियों को तत्काल बहाल किया जाए. संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 3 दिन के भीतर उन्हें वापस सेवा में नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा. पटवारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वे काम बंद रखेंगे.
क्यों हुई सेवा समाप्ति?
जिन तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनके नाम नितिन विश्वकर्मा, अजय नागर और विशाल टईया हैं. प्रशासन द्वारा इन पर स्वामित्व योजना में शून्य प्रगति, शासकीय कार्य में लापरवाही और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है.
गुना में भी कार्रवाई, पटवारी सामूहिक अवकाश पर
स्वामित्व योजना को लेकर विवाद सिर्फ देवास तक सीमित नहीं है. गुना जिले में भी इस योजना में लापरवाही बरतने पर संघ के अध्यक्ष समेत 4 पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रशिक्षु पटवारियों को नोटिस देकर बर्खास्त करने की तैयारी की जा रही है.
इस कार्रवाई से नाराज होकर गुना जिले के पटवारी भी 3 दिन के सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं. मामले में गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का कहना है कि योजना से ग्रामीणों को लाभ मिलेगा, लेकिन पटवारी असमंजस की स्थिति में हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.
क्या है स्वामित्व योजना और क्यों है पटवारियों का विरोध?
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार राज्य में स्वामित्व योजना को प्राथमिकता से लागू करवाना चाहती है. हालांकि, राजस्व विभाग से जुड़े पटवारियों का मानना है कि स्वामित्व योजना में कई व्यावहारिक अड़चनें हैं, जो भविष्य में संपत्ति संबंधी विवादों का बड़ा कारण बनेंगी.
स्वामित्व योजना की मुख्य बातें और लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की शुरुआत की थी. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों (आबादी भूमि) में स्थित संपत्तियों का ड्रोन तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण करके ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाना है.
- कानूनी मालिकाना: हक ग्रामीणों को उनकी जमीन का आधिकारिक अधिकार मिलना.
- वित्तीय लाभ: बैंक से ऋण प्राप्त करने में सुविधा.
- विवादों में कमी: संपत्ति से जुड़े आपसी विवादों का समाधान.
- आर्थिक सशक्तिकरण: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलना.
- बेहतर विकास कार्य: ग्रामीण स्तर पर सही और सटीक योजनाएं बनाना आसान होना.
ADVERTISEMENT


