मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. प्रदेश में पिछले कई सालों से लंबित '27 फीसदी ओबीसी आरक्षण' के मामले में अब अंतिम फैसले की घड़ी करीब आ गई है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) ने इस संवेदनशील मुद्दे पर फाइनल हियरिंग (अंतिम सुनवाई) की तारीखों का एलान कर दिया है.
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27 अप्रैल से शुरू होगी 'आर-पार' की सुनवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की वैधता को लेकर दायर की गई सभी 52 याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगी. कोर्ट ने इसके लिए तीन महत्वपूर्ण दिन मुकर्रर किए हैं:
27 अप्रैल, 28 अप्रैल और 29 अप्रैल: इन तीन दिनों तक दोपहर 12:30 बजे से हाईकोर्ट में इस मामले पर लगातार सुनवाई चलेगी.
मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) की बेंच ने आदेश दिया है कि सुनवाई शुरू होने से पहले सभी पक्षकार अपने लिखित तर्क (Written Submissions) जमा कर दें. साथ ही, रजिस्ट्रार जनरल को सभी याचिकाओं की जानकारी और फाइलें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का विवाद साल 2019 से शुरू हुआ था, जब तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने ओबीसी कोटे को 14% से बढ़ाकर 27% करने का निर्णय लिया था. इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट और फिर वापस हाईकोर्ट पहुंचा. इस कानूनी पेच के कारण मध्य प्रदेश की कई सरकारी भर्तियों के परिणाम 13% पदों पर होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे युवाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
सियासत और श्रेय की जंग
ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश में जमकर राजनीति भी हो रही है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल खुद को ओबीसी वर्ग का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार कोर्ट में इस मामले की ठीक से पैरवी नहीं कर रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि प्रदेश के पिछड़ा वर्ग को बढ़ा हुआ आरक्षण मिले.
युवाओं की टिकी हैं निगाहें
अब सबकी निगाहें 27 अप्रैल पर टिकी हैं. इन तीन दिनों की बहस में यह तय हो जाएगा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण मिलेगा या नहीं. हाईकोर्ट द्वारा 'इश्यूज फ्रेम' किए जाने के बाद यह साफ हो जाएगा कि बहस किन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी.
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