मध्य प्रदेश में फिर गरमाया सियासत और ब्यूरोक्रेसी का विवाद, जानिए क्यों CM मोहन यादव के पास पहुंची 6 मंत्रियों की फौज?

आकांक्षा ठाकुर

• 02:50 PM • 10 Jul 2026

Bureaucracy vs Politics: मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी और सियासत के टकराव ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के खिलाफ राज्य के छह कैबिनेट मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे. मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े विवाद, कथित मुनादी और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई है.

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मध्य प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी और सियासत का टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. इस बार मामला एक महिला मंत्री के आत्मसम्मान और जिला कलेक्टर की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है. मध्य प्रदेश सरकार के छह कैबिनेट मंत्री हाल ही में हुई एक कैबिनेट बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे. इन सभी मंत्रियों के मुख्यमंत्री के पास पहुंचने की वजह कोई सरकारी काम नहीं, बल्कि सूबे के एक आईएएस अधिकारी की शिकायत थी. मंत्रियों की इस नाराजगी के बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.

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सतना कलेक्टर के खिलाफ लामबंद हुए कैबिनेट मंत्री

राजधानी भोपाल में आयोजित हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक के बाद एक बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला. मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने के लिए छह मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल पहुंचा. इस दल में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल थे. ये सभी मंत्री सतना जिले के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के खिलाफ पूरी तरह से लामबंद नजर आए और मुख्यमंत्री के सामने अधिकारी के रवैये को लेकर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई.

क्या है मंत्रियों की नाराजगी की मुख्य वजह?

मंत्रियों की इस भारी-भरकम नाराजगी के केंद्र में मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी से जुड़ा एक विवाद है. दरअसल, मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की सत्यता को लेकर इस समय एक विवाद चल रहा है, जिसकी जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है. मंत्रियों का आरोप है कि जांच समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले ही सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के आदेश पर मंत्री प्रतिमा बागरी के पैतृक गांव में जाति प्रमाण पत्र की पुष्टि को लेकर मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवा दी गई. मंत्रियों का साफ तौर पर कहना है कि जांच का फैसला आने से पहले इस तरह की मुनादी करवाना सीधे तौर पर एक कैबिनेट मंत्री को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कार्रवाई है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

कौन हैं आईएएस डॉ. सतीश कुमार एस?

मंत्रियों के निशाने पर आए डॉ. सतीश कुमार एस मध्य प्रदेश कैडर के 2013 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से तमिलनाडु के वेल्लोर के रहने वाले डॉ. सतीश कुमार ने मद्रास मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है और डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रुख किया. वर्तमान में वह सतना जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) के रूप में तैनात हैं. इससे पहले वह शासन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों जैसे चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, सब डिवीजनल ऑफिसर और असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

सख्त और कड़क मिजाज अधिकारी माने जाते हैं कलेक्टर

प्रशासनिक हलके में कलेक्टर सतीश कुमार एस की गिनती उन चुनिंदा अधिकारियों में होती है जो अपने काम को लेकर बेहद गंभीर और हमेशा एक्शन मोड में रहते हैं. सतना जिले में निजी स्कूलों की मनमानी फीस और नियमों के उल्लंघन पर कड़ा एक्शन लेने के कारण वह काफी चर्चा में रहे हैं.

इसके अलावा जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बरतने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी वह सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं. इतना ही नहीं, वह पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए खुद साइकिल से दफ्तर जाते हैं और जिले में 'साइकिल डे' की शुरुआत करने के लिए भी काफी लोकप्रिय हैं.

अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें

यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश में मंत्रियों, विधायकों और ब्यूरोक्रेट्स के बीच इस तरह की रार देखने को मिली हो. छह-छह बड़े मंत्रियों द्वारा एक साथ शिकायत किए जाने के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पाले में चली गई है. मुख्यमंत्री ने सभी नाराज मंत्रियों की बातों और शिकायतों को बेहद ध्यान से सुना है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री अपनी ही सरकार के मंत्रियों के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं या फिर इस प्रशासनिक विवाद को सुलझाने के लिए क्या बीच का रास्ता निकाला जाता है.