मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है. बीजेपी ने सस्पेंस खत्म करते हुए तीसरी सीट के लिए भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. बीजेपी की तरफ से मैदान में उतरे महेश केवट की एंट्री ने कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राह को बेहद मुश्किल बना दिया है. इस फैसले के बाद से ही मध्य प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर है और कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई है.
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क्या है विधानसभा का पूरा अंकगणित?
मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के लिहाज से देखा जाए तो सदन में फिलहाल कुल 228 विधायक मौजूद हैं. राज्यसभा की एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 58 विधायकों के मतों (वोटों) की जरूरत होती है.
पार्टियों की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
- भाजपा (BJP): 164 विधायक
- कांग्रेस (Congress): 64 विधायक
- बीजेपी का गणित और महेश केवट की राह
बीजेपी के पास 164 विधायक हैं. अपनी पहली दो सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए बीजेपी को 58 + 58 यानी कुल 116 वोटों की जरूरत होगी. दो उम्मीदवारों की सुरक्षित जीत के बाद भी बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बचेंगे.
तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को जिताने के लिए बीजेपी को 58 वोटों की जरूरत है, यानी पार्टी अभी भी बहुमत से 10 वोट दूर है. अगर इसमें भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के कमलेश्वर डोडियार और कांग्रेस से बीजेपी की तरफ झुकाव रखने वालीं निर्मला सप्रे का वोट भी जोड़ लिया जाए, तो बीजेपी का आंकड़ा 50 तक पहुंच जाता है. इसके बावजूद महेश केवट की जीत के लिए बीजेपी को 8 और विधायकों के क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ेगी.
कांग्रेस के लिए क्यों खड़ी हुई बड़ी चुनौती?
कागजी तौर पर कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जो मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए जरूरी 58 वोटों से ज्यादा हैं. लेकिन कांग्रेस की मुश्किलें अंदरूनी समीकरणों और अदालती फैसलों की वजह से बढ़ी हुई हैं:
- मुकेश मल्होत्रा: श्योपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा कोर्ट के आदेश के चलते वोट नहीं डाल पाएंगे.
- निर्मला सप्रे: बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का रुख लगातार बीजेपी के पक्ष में देखा जा रहा है.
- दतिया विधायक: दतिया से कांग्रेस विधायक की सदस्यता को लेकर भी कोर्ट में मामला लंबित है, जिससे उनके वोट डालने पर संशय बरकरार है.
इन समीकरणों की वजह से कांग्रेस के वोटों की संख्या घटकर करीब 61-62 के आसपास आ जाती है. कांग्रेस को डर है कि अगर बीजेपी ने अतिरिक्त 8 वोटों का इंतजाम करने के लिए 'क्रॉस वोटिंग' का दांव चला, तो 2020 का इतिहास दोहराया जा सकता है. यही वजह है कि कांग्रेस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और अपने सभी विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशों में जुट गई है.
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