मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) का बिगुल फूंक चुका है. सूबे की तीन राज्यसभा सीटों के लिए आगामी 18 जून को वोटिंग होनी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं. वहीं, कांग्रेस ने अपनी दिग्गज नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natrajan) को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. यह सीट वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है, जिन्होंने पहले ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था.
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लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नाम सामने आते ही मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह चुनाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए किसी अग्निपरीक्षा या 'गले की फांस' से कम नहीं होने वाला है.
कांग्रेस में नाराजगी और बगावत के सुर
राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन के नाम पर कांग्रेस के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं. कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी है. कुछ धड़ों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसी 'जमीन से जुड़े' नेता को मौका मिलना चाहिए था. वहीं, कुछ नेताओं ने दिग्विजय सिंह की पैरवी करते हुए लिखा कि केवल वही विधायकों को एकजुट रख सकते थे. इसके अलावा कमलनाथ और नकुलनाथ के खेमे को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है, क्योंकि हाल ही में छिंदवाड़ा के कांग्रेस विधायकों ने बीजेपी नेता नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी.
राज्यसभा का उलझा हुआ अंकगणित
- मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं और एक राज्यसभा प्रत्याशी को जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है.
- बीजेपी की स्थिति: बीजेपी के पास कुल 165 विधायक हैं. अपने दो उम्मीदवारों को सुरक्षित जिताने के बाद भी बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बचते हैं.
- कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस के पास कहने को 62 विधायक हैं (जो 58 के जादुई आंकड़े से 4 ज्यादा हैं), लेकिन असल संकट अंदरूनी है.
- दतिया की सीट रिक्त हो चुकी है और विजयपुर के विधायक को सुप्रीम कोर्ट ने मतदान से बाहर रखा है. वहीं निर्मला सप्रे जैसी विधायक लगातार कांग्रेस से दूरी बनाए हुए हैं.
क्या बीजेपी खेलेगी तीसरा दांव?
अगर बीजेपी तीसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार उतार देती है, तो उसे अपनी तीसरी सीट जिताने के लिए केवल 8 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के रुख को मिला लें तो यह दूरी और कम हो सकती है. ऐसे में अगर कांग्रेस के महज 5 से 6 विधायकों ने भी क्रॉस वोटिंग कर दी या वो अनुपस्थित रहे, तो मीनाक्षी नटराजन की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी.
हरियाणा और बिहार के पिछले राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस पहले ही क्रॉस वोटिंग का दंश झेल चुकी है. अब देखना यह होगा कि 18 जून को प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने कुनबे को एक साथ रख पाते हैं या कांग्रेस को मध्य प्रदेश में एक और बड़ा झटका लगता है.
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