रोहित यादव कटी हुई चोटी लेकर पहुंचा था थाने, दीपक पांडे पर लगाए गंभीर आरोप, लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली

Rewa choti kand: मध्य प्रदेश के रीवा में हाथ में कटी चोटी लेकर सड़क पर निकले रोहित यादव ने सनसनी मचा दी. जातिगत अपमान के आरोपों ने सियासी तूल पकड़ लिया, लेकिन पुलिस जांच में जो सच सामने आया उसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी. मेडिकल रिपोर्ट से लेकर बयान तक कई चौंकाने वाले खुलासे हुए.

MP Rohit Yadav Rewa Choti Kand
रीवा में चोटी काटने वाले केस का बड़ा खुलासा

हरिओम सिंह

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Rohit Yadav choti case: रीवा की सड़कों पर जब रोहित यादव हाथ में अपनी कटी हुई चोटी लेकर इंसाफ मांगने निकले तो हर कोई हैरान रह गया. रोहित ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसकी शिखा (चोटी) काट दी. युवक का कहना था कि वो यादव समाज से आते हैं और आरोपियों ने उस पर ब्राह्मण न होने के बावजूद शिखा रखने पर आपत्ति जताई. मामला बढ़ता देख अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं के भी बयान सामने आने लगे. 

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इस बीच राेहित कटी हुई चोटी लेकर पुलिस थाने पहुंचा और मामले की शिकायत की. पुलिस ने जब जांच की तो पूरा मामला ही पलट गया. पुलिस के मुताबिक, रोहित को खुद नहीं पता था कि उसके साथ मारपीट करने वाले किस जाति के थे. वो जिन पर आरोप लगा रहा था उन्हें भी रोहित की जाति की जानकारी नहीं थी.

क्या था मामला?

इस चोटी कांड में रीवा पुलिस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किया हैं. पुलिस का कहना है कि ये एक छोटी सी झड़प थी जिसने जातिगत नफरत का रूप ले लिया. मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 2 जनवरी 2026 को रोहित यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जब वह अपनी गाड़ी से डीजल निकाल रहा था तब दो व्यक्तियों से उसकी बहस और मारपीट हुई. युवक का आरोप था कि इसी दौरान उसकी चोटी काट दी गई. इसकी शिकायत उसने खुद पुलिस थाने में दर्ज करवाई.

मेडिकल जांच में ये निकला

अब इस मामले में पुलिस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. पुलिस का कहना है कि जब मामले में रोहित से  पूछताछ की तो पीड़ित ने खुद स्वीकार किया कि घटना के वक्त वो आरोपियों की जाति या धर्म के बारे में कुछ नहीं जानता था. इसी तरह आरोपी भी रोहित की पहचान से अनजान थे. पुलिस ने बताया कि मेडिकल जांच में चोटी उखाड़ने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं. सबसे संदिग्ध बात यह रही कि रोहित ने वह चोटी पुलिस को जांच के लिए सौंपने से बार-बार इनकार कर दिया.

पुलिस ने कया बताया?

पुलिस का कहना है कि जातिगत अपमान और नफरत के जो आरोप लगाए गए थे वे पूरी तरह तथ्यहीन पाए गए हैं. फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है. इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाए सामने आ रही है.

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