दमोह में असली अस्पताल में इलाज कर रहे थे 3 नकली डॉक्टर, 1 साल तक मरीजों को बनाते रहे बेवकूफ, ऐसे हुआ खुलासा

दमोह में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संजीवनी अस्पतालों में फर्जी MBBS डिग्री के सहारे साल भर से नौकरी कर रहे तीन नकली डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस खुलासे के बाद पुलिस पैसे लेकर फर्जी डिग्री, रजिस्ट्रेशन और सरकारी नौकरी दिलाने वाले एक बड़े गिरोह की तलाश में जुट गई है.

दामोह से आया फर्जी डॉक्टर का मामला
दामोह से आया फर्जी डॉक्टर का मामला

शांतनु भारत

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मध्य प्रदेश के दमोह जिले से स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार कर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे तीन ऐसे फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी MBBS डिग्री के सहारे पिछले एक साल से नौकरी कर रहे थे. हैरान करने वाली बात यह है कि ये तीनों आरोपी केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलने वाले संजीवनी क्लीनिक/अस्पतालों में तैनात थे. दमोह पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो जालसाजों को स्थानीय स्तर पर और तीसरे को जबलपुर से गिरफ्तार किया है.

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कैसे हुआ इस 'मुन्नाभाई' गैंग का पर्दाफाश?

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को इन डॉक्टरों को लेकर कुछ शिकायतें मिलीं. विभाग ने जब अंदरूनी तौर पर इसकी जांच कराई तो पाया कि जिले के संजीवनी अस्पतालों में तैनात कुछ डॉक्टरों के दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए CMHO ने तुरंत इसकी रिपोर्ट दमोह एसपी (SP) आनंद कलादगी को सौंपी. पुलिस ने जब जांच की परतें खोलीं तो पूरा मामला सच साबित हुआ. 

क्या कहा पुलिस ने?

दमोह एसपी आनंद कलादगी के मुताबिक- करीब एक साल पहले जिले के संजीवनी अस्पतालों के लिए डॉक्टरों की भर्ती निकाली गई थी. इसी भर्ती में जालसाजों ने फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर सरकारी सिस्टम में एंट्री पा ली. 

पुलिस के जाल में ऐसे फंसे आरोपी

विभाग से हरी झंडी मिलते ही पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने सबसे पहले ग्वालियर के रहने वाले कुमार सचिन यादव को हिरासत में लिया. पुलिसिया पूछताछ के आगे कुमार सचिन ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी कहानी उगल दी.

इसके बाद पुलिस ने बिना वक्त गंवाए कुछ ही घंटों में दूसरे आरोपी राजपाल गौर (निवासी- सीहोर) को भी दबोच लिया. राजपाल ने भी माना कि उसकी MBBS की डिग्री पूरी तरह फर्जी है.

जबलपुर तक फैले हैं तार

पकड़े गए दोनों फर्जी डॉक्टरों से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने एक और चौंकाने वाला नाम उगला. उन्होंने बताया कि उनका एक और साथी इसी तरह की फर्जी डिग्री के दम पर जबलपुर में मरीजों का इलाज कर रहा है. दमोह पुलिस ने तुरंत एक टीम जबलपुर भेजी और वहां से तीसरे फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य को भी गिरफ्तार कर लिया.

पैसे लेकर नौकरी और फर्जी रजिस्ट्रेशन का खेल

एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि यह मामला सिर्फ फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है. शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि इन आरोपियों को मोटी रकम लेकर फर्जी डिग्रियां मुहैया कराई गईं. पैसे के दम पर ही संजीवनी अस्पतालों में इनकी नियुक्तियां पक्की की गईं. यहां तक कि मेडिकल काउंसिल में इनका फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने में भी कुछ लोगों ने मदद की.

आगे की कार्रवाई

पुलिस को इस गिरोह के मुख्य सरगनाओं और कुछ अन्य संदिग्धों के नाम भी पता चले हैं. पुलिस का दावा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होंगी, जिससे स्वास्थ्य विभाग में चल रहे एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ होने की पूरी उम्मीद है.

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