मध्य प्रदेश लीग (MPL 2026) का तीसरा सीजन इंदौर में बेहद रोमांचक अंदाज में संपन्न हुआ. इस सीजन में पुरुषों के साथ-साथ मध्य प्रदेश की बेटियों और महिला क्रिकेटरों ने भी मैदान पर अपना जबरदस्त दमखम दिखाया. टूर्नामेंट में पहली बार उतरी ग्वालियर शेरनीज (Gwalior Shernies) की टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया और रनर-अप (उपविजेता) रही. टीम की कप्तान और महिला प्रीमियर लीग (WPL) खेल चुकीं अनुभवी खिलाड़ी नुजहत परवीन को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' (Player of the Tournament) और 'ऑरेंज कैप' से नवाजा गया.
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इस ऐतिहासिक सफलता के बाद नुजहत परवीन ने 'एमपी तक' से विशेष बातचीत की और अपनी इस यादगार जर्नी के साथ-साथ महिला क्रिकेट के भविष्य पर खुलकर बात की.
करीबी फाइनल मैच और यादगार डेब्यू
नुजहत परवीन ने बताया कि लगभग 10 साल बाद मध्य प्रदेश के घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट में उनकी वापसी हुई है. उन्होंने कहा, "यह मेरा और ग्वालियर शेरनीज दोनों का ही एमपीएल में डेब्यू था. ऑन पेपर किसी को उम्मीद नहीं थी कि हमारी टीम फाइनल तक पहुंचेगी या क्वालिफाई करेगी. लेकिन हमारी लड़कियों, स्टाफ और ओनर्स ने जो भरोसा दिखाया, उसी का नतीजा था कि हम ट्रॉफी के इतने करीब पहुंचे." नुजहत ने इस टूर्नामेंट को अपने करियर का एक बड़ा मोटिवेशन बताया.
रिमोट एरिया की लड़कियों को मिला बड़ा प्लेटफॉर्म
टूर्नामेंट में जमीनी स्तर की खिलाड़ियों को शामिल करने के नियम की तारीफ करते हुए नुजहत ने कहा, "एमपीएल में दो डेवलपमेंट खिलाड़ियों को खिलाने का जो नया नियम था, उसने नई लड़कियों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म तैयार किया. जो लड़कियां टीवी पर मैच देखकर प्रेरित होती थीं, उन्हें मैदान पर आकर हमारे साथ अनुभव साझा करने का मौका मिला."
'लड़कियां लड़कों से कम नहीं, पैरेंट्स सपोर्ट करें'
महिला क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता पर बात करते हुए नुजहत ने पैरेंट्स से खास अपील की. उन्होंने कहा, "आजकल ये टूर्नामेंट टीवी पर लाइव आ रहे हैं, जिससे पैरेंट्स भी देख रहे हैं कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं और मैदान पर तूफानी पारियां खेल रही हैं. मैं सभी पैरेंट्स से कहूंगी कि अपनी बेटियों पर भरोसा जताएं, उन्हें रोकें नहीं और उनका सपोर्ट करें. लड़कियां हर फील्ड में बेहतरीन रिजल्ट देती हैं."
भविष्य में ऑक्शन और वित्तीय सहयोग की उम्मीद
एमपीएल के विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल जहां तीन टीमें थीं, वहीं इस साल पांच टीमों ने हिस्सा लिया, जिससे कंपटीशन बढ़ा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में महिला खिलाड़ियों के लिए ऑक्शन (Auction) की प्रक्रिया भी शुरू होगी, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर वित्तीय सहायता (Financial Support) मिलेगी और क्रिकेट की क्वालिटी और भी बेहतर होगी.
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