देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) में हुए कथित महाघोटाले की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं. मामले की तफ्तीश कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथ आज एक और बड़ी सफलता लगी है. सीबीआई ने पेपर लीक नेटवर्क में बेहद अहम भूमिका निभाने वाली और पेपर सेटिंग कमेटी की सदस्य मनीषा मंधारे को गिरफ्तार कर लिया है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और आरोपियों की भूमिका को देखते हुए आरोपी मनीषा को 14 दिनों की सीबीआई रिमांड पर सौंप दिया है.
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बॉटनी-जूलॉजी प्रश्न पत्र के अनुवाद से जुड़ी थी मनीषा
सीबीआई ने अदालत में सुनवाई के दौरान बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा मंधारे की भूमिका इस पूरे घोटाले में एक केंद्रीय कड़ी की तरह थी. वह परीक्षा के लिए तैयार होने वाले बॉटनी (Botany) और जूलॉजी (Zoology) विषय के प्रश्न पत्रों के अनुवाद (Translation) कार्य से जुड़ी हुई थी. इसी जिम्मेदारी के कारण उसकी पहुंच सीधे मूल प्रश्न पत्र (Original Question Paper) तक हो गई थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया.
सीबीआई की जांच में यह भी साफ हुआ है कि मनीषा इस खेल में अकेली नहीं थी. उसने पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर एक सुनियोजित और बेहद शातिराना साजिश रची. मनीषा मंधारे ने ही असली प्रश्न पत्र को मुख्य आरोपी शुभम नाम के शख्स तक पहुंचाया था, जिसके बाद इस लीक पेपर को पूरे नेटवर्क और राज्यों में फैला दिया गया.
देश के कई राज्यों में फैले हैं तार
अदालत से लंबी कस्टडी की मांग करते हुए सीबीआई ने दलील दी कि इस महाघोटाले के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं. इस बड़े रैकेट की पूरी सच्चाई और इसमें शामिल अन्य किरदारों को बेनकाब करने के लिए आरोपी को अलग-अलग राज्यों में ले जाकर पूछताछ और जांच करना बेहद जरूरी है. फिलहाल, सीबीआई की कई टीमें अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं.
अब सामने आया मध्य प्रदेश कनेक्शन
इस पूरे मामले में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब इस महाघोटाले का मध्य प्रदेश कनेक्शन भी सामने आ गया. राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में से एक, डॉक्टर शुभम खैरनार का संबंध मध्य प्रदेश के सिहोर में स्थित 'श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज' से पाया गया है.
नाशिक (महाराष्ट्र) के रहने वाले शुभम खैरनार ने साल 2021 में इस यूनिवर्सिटी के बीएएमएस (BAMS) कोर्स में दाखिला लिया था. हालांकि, मामले के तूल पकड़ते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस छात्र से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है.
यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मुकेश तिवारी ने इस संबंध में बताया:
"शुभम खैरनार ने साल 2021 में हमारे यहां आयुर्वेदा पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था. लेकिन एडमिशन के बाद से वह किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में शामिल नहीं हुआ. विभाग द्वारा कई बार बुलाए जाने और सूचना देने के बाद भी वह कॉलेज नहीं आया, न ही उसने कक्षाएं अटेंड कीं और न ही किसी परीक्षा में बैठा. सिहोर कोतवाली पुलिस ने हमसे संपर्क कर उसके दस्तावेज मांगे थे, जो हमने सौंप दिए हैं. हम निष्पक्ष जांच में प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं."
मेहनती छात्रों के भविष्य पर बड़ा कुठाराघात
इस सनसनीखेज खुलासे ने देश की परीक्षा प्रणाली और उसकी गोपनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. देश के करोड़ों छात्र और उनके अभिभावक जिन प्रतिष्ठित संस्थाओं पर भरोसा करते हैं वहीं के अंदरूनी लोग यानी प्रश्न पत्र तैयार करने और अनुवाद करने वाले ही जब इस घिनौने खेल में शामिल पाए जाएं तो लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकार में जाना तय है. फिलहाल सीबीआई अगले 14 दिनों की रिमांड के दौरान मनीषा मंधारे से इस नेटवर्क के बाकी चेहरों और पूरे ऑपरेशन की हर एक परत को उखाड़ने में जुटी हुई है.
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