'मेरे लायक कोई मदद हो तो.....' राहुल गांधी के सवाल पर मृतक NEET छात्रा आकांक्षा की मां नीलम ने दिया ये जवाब

मऊगंज की NEET छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत के बाद राहुल गांधी ने परिजनों से फोन पर बात की. उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और मदद की पेशकश की. जानिए बातचीत में मां और चाचा ने क्या कहा और कैसे पेपर लीक विवाद आकांक्षा के जान पर बन आई.

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मृतक NEET छात्रा आकांक्षा की मां और चाचा से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फोन पर बात की.

बृजेश उपाध्याय

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मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव में मातम पसरा है. NEET छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं. अब रह गई तो बस उनके यादें और मां-पिता के मन में पछतावा कि बिटिया क्यों चली गई. वो बिटिया जो मां नीलम चतुर्वेदी और पिता हनुमान प्रसाद चतुर्वेदी के लिए सबकुछ थी. उसकी प्रतिभा पर दोनों नाज करते थे. पिता अब अस्पताल में हैं. वहीं शुक्रवार को कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़ित परिजन को फोन किया. राहुल गांधी ने उन्हें ढांढस बंधया और पूछा- 'मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?'...राहुल गांधी के इस सवाल पर मृतक आकांक्षा की मां ने कहा- ''अब मैं आपसे क्या कहूं, आप तो खुद ही देश की रक्षा कर रहे हैं. मेरा तो जो गया, वो तो आएगा नहीं.'' आकांक्षा के चाचा बोले- 'आपके माध्यम से... हमें 2.5 लाख रुपए मिल चुके हैं और 50,000 रुपए आज मिलने वाले हैं...आपका धन्यवाद.'

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NEET छात्र आकांक्षा के मां और चाचा के साथ फोन पर बातचीत के इस वीडियो को आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने फेसबुक पर शेयर किया है. गौरतलब है कि नीट छात्रा आकांक्षा ने परीक्षा देने के बाद माता-पिता से उम्मीद जताई थी कि उनके अच्छे अंक आएंगे और वे जल्द ही डॉक्टर बनने वाली हैं. परिवार में खुशियां ही खुशियां थी. तभी नीट पेपर लीक की सूचना और परीक्षा रद्द होने से परेशान आकांक्षा ने 20 मई को नागपुर में अपने कमरे में जान दे दी. आकांक्षा ने एक चिट्‌ठी छोड़ी थी जिसमें लिखा था- ''मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि आपकी बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर.'' 

राहुल गांधी से फोन पर क्या बातें हुईं ?

राहुल गांधी (फ़ोन पर): हेलो?

आकांक्षा की मां नीलम: नमस्ते सर. 

राहुल गांधी : नमस्कार, नमस्कार. मैं आज... एयरपोर्ट जा रहा था और मैंने आपकी बेटी की चिट्ठी पढ़ी तो मुझे बहुत दुःख हुआ और इसलिए मैंने आपको फ़ोन किया. बस प्यार देना चाहता था. और अगर कोई मेरे लायक कोई मदद हो या काम हो तो... मैं कर सकता हूं.

नीलम: अब मैं आपसे क्या कहूँ, आप तो खुद ही देश की रक्षा कर रहे हैं. मेरा तो जो गया, वो तो आएगा नहीं.

राहुल गांधी: हां, मैंने देखा। बेचारी उसका, उस केस में कोई गलती नहीं थी। उसने कुछ... कुछ गलत नहीं किया, बस पढ़ाई की थी। आपने कर्ज़ लिया... मतलब, बिलकुल...

नीलम: सबसे बड़ी बात, दुःख की हमको ये है कि उसने इतनी मेहनत करी, शायद ऐसा ना होता तो... ये ना होता. हमारा तो कोई दूसरा है भी नहीं। एक ही तो बेटी थी मेरी.

राहुल गांधी: हां...

नीलम: इसी के भरोसे पिताजी भी उसके टिके थे, इसी के भरोसे मैं भी टिकी थी.

राहुल गांधी: वो रोती थी और उसने चिट्ठी में लिखा कि उसको लगा कि उसने आपको बर्बाद कर दिया.

नीलम: नहीं, वो...

राहुल गांधी: कि उसने... आपने कर्ज़ा लिया था और उसने आपको बर्बाद कर दिया, मतलब... क्या बेचारी... कितना दर्द हुआ, दुःख हुआ होगा उसको.

नीलम: अब आप चिट्ठी पढ़कर खुद सोच सकते हैं कि इसके अलावा जब उसने ऐसा लिखी, तो उसके मां-बाप उसको कैसे वहां तक पहुंचाए होंगे.

राहुल गांधी: वही, वही, वही. तो आपने पूरा मतलब... कर दिया, आपने अपनी पूरी मेहनत की और फिर ये पूरा का पूरा... ऐसे ही मतलब पूरा टूट गया.

नीलम: पूरा टूट गया. उसका सपना था कि मेरे अच्छे मार्क्स आए हैं तो पेपर मेरा लीक ना होता तो मैं डॉक्टर बन जाती. क्योंकि मेरी बड़ी लड़की ही थी, बेटा तो मेरा छोटा है. वो तो कुछ कर नहीं सकता, उसकी तो अभी कोई ग्रेजुएशन भी नहीं हुई है. अब पिताजी की तो कोई कुछ कहने लायक है ही नहीं. पिताजी को तो पानी हाथ में... वो कभी पी सकते हैं अब.

राहुल गांधी: अच्छा, क्या पापा को पैरालिटिक अटैक हुआ था?

नीलम: उनका दो अटैक का ऑपरेशन हुआ है और पैरालिसिस भी मारा है. उनका दाहिना हाथ नहीं हिलता.

राहुल गांधी: तो बस मैं आपको फ़ोन करना चाहता था. अगर मेरे लायक कुछ हो तो बता देना उनको, एनएसयूआई (NSUI) वालों को.

आकांक्षा के चाचा : आपके माध्यम से... हमें 2.5 लाख रुपए प्राप्त हो चुके हैं, 50,000 रुपए आज भी आने वाला है.

राहुल गांधी: हमारे जो लोग आए हैं, उनको भी आप ये बता दीजिए. मगर बस मैं आपको... अपना प्यार देना चाहता था, माताजी को और आपको.

आकांक्षा के चाचा : धन्यवाद.

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