मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा और सभी की निगाहें दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव (बाय-इलेक्शन) पर टिकी हुई हैं. दतिया उपचुनाव फिलहाल सबसे बड़े विवादों और सुर्खियों में बना हुआ है. दरअसल, साल 2023 में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तब बड़ा झटका लगा था, जब उनके दिग्गज नेता और तत्कालीन सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा दतिया सीट से चुनाव हार गए थे. नरोत्तम मिश्रा के इस गढ़ में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने 7 हजार से भी अधिक वोटों से जीत हासिल कर विजय पताका फहराई थी. हालांकि, अब साल 2026 में आकर कांग्रेस और राजेंद्र भारती को एक बड़ा झटका लगा, जिसके बाद दतिया की सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं.
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राजेंद्र भारती की क्यों गई विधायकी
राजेंद्र भारती को करीब 20 साल पुराने एक को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े मामले में दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) ने सजा सुनाई थी. अप्रैल 2026 के शुरुआती दिनों में कोर्ट का यह फैसला आने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए राजेंद्र भारती की विधायकी को रद्द कर दिया गया था. इसके बाद भोपाल से लेकर दतिया तक काफी सियासी हंगामा देखने को मिला था. हाल ही में निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा दतिया सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान करने के बाद यह सीट एक बार फिर देश भर की चर्चा में आ गई है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक, दतिया में 30 जुलाई को वोटिंग होनी है और 3 अगस्त को इसके नतीजे सामने आएंगे.
दिल्ली हाईकोर्ट में हुई 1 घंटे की सुनवाई
एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में करीब 1 घंटे तक मैराथन सुनवाई चली, जहां राजेंद्र भारती के वकीलों ने अदालत के सामने अपनी मजबूत दलीलें पेश कीं. इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग को भी पहले ही नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था. बुधवार की कार्यवाही समाप्त होने के बाद अब मामले में सरकारी पक्ष (सरकारी वकील) की सुनवाई गुरुवार (9 जुलाई) को होनी तय हुई है. गुरुवार को अदालत दूसरा पक्ष सुनने के बाद ही आगे की कार्यवाही और राजेंद्र भारती को मिलने वाली संभावित राहत पर कोई फैसला करेगी.
क्या टल जाएगा दतिया उपचुनाव?
कोर्ट की इस कार्यवाही के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या दतिया में होने वाले उपचुनाव टल जाएंगे. यदि दिल्ली हाईकोर्ट गुरुवार की सुनवाई के बाद राजेंद्र भारती के पक्ष में फैसला सुनाता है या उनकी सजा पर रोक लगाता है, तो दतिया बाय-इलेक्शन के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है. कोर्ट के फैसले और निर्वाचन आयोग के जवाब पर ही अब दतिया चुनाव का होना या न होना निर्भर करेगा. यही वजह है कि मध्य प्रदेश के तमाम राजनीतिक पंडितों और जनता की निगाहें अब हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हुई हैं.
चुनावों को लेकर दोनों दलों की तैयारी और चुनौतियां
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर बीजेपी और नरोत्तम मिश्रा ने बहुत पहले से ही अपनी कमर कस रखी है. नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में एक्टिव हैं, ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं और जातिगत समीकरणों को साधने में जुटे हैं. इस बार उनके बयानों में काफी नरमाहट और भावुकता भी देखने को मिल रही है. दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी निर्वाचन आयोग और भाजपा पर हमलावर है और उसका आरोप है कि आयोग ने बेहद जल्दबाजी में चुनाव की घोषणा की है.
हालांकि, अभी तक दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने आधिकारिक उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की है. माना जा रहा है कि बीजेपी से नरोत्तम मिश्रा ही मैदान में उतरेंगे, लेकिन कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर जबरदस्त जद्दोजहद मची हुई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि एक तरफ जहां राजेंद्र भारती अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं, वहीं क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानीय कांग्रेस नेता भी दिल्ली और भोपाल में जुगत लगाने में जुटे हैं, जिससे कांग्रेस के सामने उम्मीदवार चयन की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
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