मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी है. झमाझम बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई इलाके टापू में तब्दील हो चुके हैं. इस प्राकृतिक आपदा में सबसे बुरा हाल सतना जिले की धार्मिक नगरी चित्रकूट का है. देर शाम हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी और सिमरावल नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया, जिससे घाट पानी में डूब गए और रिहाइशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुस आया. जलभराव के कारण पूरे इलाके में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है.
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एक्शन मोड में सीएम मोहन यादव, दिल्ली से सीधे पहुंचे रीवा
बाढ़ और बारिश के कारण पैदा हुए गंभीर हालात को देखते हुए सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तुरंत एक्शन में आ गए. वे दिल्ली दौरे पर थे, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे. रीवा पहुंचते ही सीएम ने देर रात अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक बुलाई. इसके साथ ही उन्होंने सतना कलेक्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चित्रकूट और आसपास के इलाकों के हालात की पल-पल की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों का हेलीकॉप्टर से भी जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत व बचाव कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
700 लोगों का रेस्क्यू, 10 स्थानों पर बनाए गए आश्रय स्थल
हालात की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सिमरावल और मंदाकिनी नदी के कारण सतना और चित्रकूट में स्थिति गंभीर हुई थी. प्रशासन और रेस्क्यू टीमों ने तत्परता दिखाते हुए लगभग 700 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है. इनमें से दो लोगों को हेलीकॉप्टर और बाकी लोगों को नावों के जरिए रेस्क्यू किया गया. राहत कार्य के तहत प्रमोद वन, विकास प्राधिकरण, मदन गोपाल, गायत्री पीठ, वीरसिंहपुर, कोठी और सतना के अलग-अलग 10 स्थानों पर आश्रय स्थल बनाए गए हैं. अब तक 6,000 से अधिक फूड पैकेट बांटे जा चुके हैं और राहत कार्य लगातार जारी है.
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
चित्रकूट के भौगोलिक ढांचे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी का पानी बहुत जल्दी शहर में प्रवेश कर जाता है. चित्रकूट में छात्रावास, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालु मौजूद हैं. सीएम ने प्रशासन को दो टूक निर्देश दिए हैं कि हर नागरिक और श्रद्धालु की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का यह दौर अभी जारी रह सकता है, लेकिन सरकार हर स्थिति से निपटने और लोगों तक भोजन, दवाइयां व जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
प्रशासन ने जारी किया आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर
बाढ़ और जलभराव की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. किसी भी तरह की मदद या सूचना के लिए लोग हेल्पलाइन नंबर 07672223211 पर संपर्क कर सकते हैं. वहीं, जमीनी हकीकत और राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे.
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