मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ग्वालियर सिंधिया राजपरिवार की 41,000 करोड़ रुपये की शाही संपत्ति के बंटवारे का मामला एक बार फिर गहराता हुआ नजर आ रहा है. लंबे समय से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच चल रहे इस विवाद को सुलझाने के लिए 1000 पन्नों का एक आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट ड्राफ्ट (समझौता) तैयार किया गया था. लेकिन अब इस मामले में जीवाजीराव सिंधिया की नातिन प्रतिमा राजे (प्रतिमा देवी) की एंट्री के बाद कानूनी पेंच फंस गया है.
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पहली बार व्यक्तिगत रूप से कोर्ट पहुंचीं प्रतिमा देवी
हाल ही में प्रतिमा देवी व्यक्तिगत रूप से ग्वालियर जिला न्यायालय पहुंचीं. उन्होंने अदालत में कैविएट और आवेदन दायर कर मांग की है कि बिना उनका पक्ष सुने इस समझौते या संपत्ति बंटवारे पर कोर्ट कोई भी अंतिम फैसला न सुनाए. कोर्ट के बाहर मीडिया से बातचीत में प्रतिमा देवी और उनकी बेटी शिवांगिनी ने अपने ही रिश्तेदारों पर सालों तक गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया:
- कानूनी हक पर सवाल: प्रतिमा देवी ने कहा कि "मुझे जो कुछ भी देने की बात कही जा रही है, वह कोई बोनस नहीं बल्कि मेरा कानूनी हक है. हमें यह कहकर गुमराह किया गया कि यह प्रक्रिया हमारे फायदे के लिए है, जबकि हकीकत में हमें लगभग कुछ नहीं दिया जा रहा."
- चारों बेटियों का बराबर अधिकार: प्रतिमा देवी जीवाजीराव सिंधिया की बेटी की बेटी हैं. उन्होंने मांग उठाई कि राजपरिवार की चारों बेटियों को संपत्ति में पूरा और बराबर कानूनी अधिकार मिलना चाहिए.
- दबाव में दस्तखत के आरोप: उनकी बेटी शिवांगिनी ने आरोप लगाया कि उन पर बिना पूरी कानूनी जानकारी दिए कुछ कागजों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की गई.
- वसीयत और कर्ज का मुद्दा: प्रतिमा देवी ने वसीयत की कॉपी न मिलने और संपत्तियों को बेचकर कर्ज चुकाने की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं.
क्या है 1000 पन्नों का समझौता?
इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच संपत्ति विवाद निपटाने के लिए एक आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट तैयार हुआ था. 1000 पन्नों के इस समझौते के मुताबिक जो संपत्ति जिसके पास है, वह उसी की मानी जानी थी लेकिन प्रतिमा देवी का दावा है कि उन्हें इस समझौते की पूरी जानकारी नहीं दी गई और उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया गया.
अब 10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान उषा राजे के पक्ष की ओर से कोर्ट से समय मांगा गया है. प्रतिमा देवी के आवेदन का जवाब पहले ही पेश किए जाने का दावा किया गया है, जिसमें समझौते के दस्तावेजों पर प्रतिमा देवी के हस्ताक्षर मौजूद होने की बात कही गई है. फिलहाल, ग्वालियर कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर तय की है. 10 सितंबर की सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 41 हजार करोड़ का यह हाई-प्रोफाइल विवाद समझौते की ओर बढ़ेगा या इसमें नया कानूनी पेंच फंसा रहेगा.
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