ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की लगभग 41,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे का विवाद एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा में है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में अंतरिम आवेदनों और आपत्तियों पर सुनवाई पूरी होने के बाद प्रतिमा देवी राना की गवाही के लिए 29 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है.
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प्रतिमा देवी राना (ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बुआ पद्मावती राजे की बेटी) का आरोप है कि संपत्ति बंटवारे के समझौते पर धोखे में रखकर उनके हस्ताक्षर कराए गए थे. अब उन्हें अदालत के सामने अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे.
मामला क्या है और प्रतिमा देवी ने क्या सवाल उठाए?
- सिंधिया परिवार के सदस्यों ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और ऊषा राजे की ओर से अदालत में संपत्ति बंटवारे से जुड़ा एक समझौता पेश किया गया था. प्रतिमा देवी ने इस समझौते पर आपत्ति दर्ज कराई है:
- जानकारी छिपाने का आरोप: प्रतिमा देवी का कहना है कि उन्हें समझौते और कानूनी दस्तावेजों की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी.
- नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल: उन्होंने कहा कि जब वह लंबे समय से काठमांडू में रह रही थीं, तो कानूनी नोटिस नेपालगंज के पते पर क्यों भेजे गए?
दूसरे पक्ष और ज्योतिरादित्य सिंधिया का रुख
दूसरी तरफ, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, ऊषा राजे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष ने धोखाधड़ी के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है:
- आपसी सहमति से हुआ समझौता: दूसरे पक्ष की दलील है कि समझौते को तैयार करने में करीब पांच साल लगे थे और वकील भी शामिल थे.
- पारिवारिक डिनर और तस्वीरें: पक्ष ने हवाला दिया कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर के बाद पारिवारिक डिनर हुआ था और तस्वीरें भी ली गई थीं, जो यह साबित करती हैं कि समझौता सभी की सहमति से हुआ था.
₹41,000 करोड़ की संपत्ति में क्या है शामिल?
विवादित संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 41,000 करोड़ रुपये माना जा रहा है, जिसमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जयविलास पैलेस समेत देश भर की कई कीमती संपत्तियां शामिल हैं. हालांकि, यह आंकड़ा एक अनुमानित मूल्य है और अदालत द्वारा तय अंतिम मूल्य नहीं है.
अब सबकी निगाहें 29 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां प्रतिमा देवी द्वारा पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से इस कानूनी विवाद की आगे की दिशा तय होगी.
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