MP Sheopur Tehsildar video viral: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां जिला प्रशासन की जनसुनवाई में अपनी दुकान के विवाद की फरियाद लेकर पहुंचे एक बुजुर्ग प्रशासनिक भवन के फर्श पर ही तड़पते रहे. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर मौजूद तहसीलदार मैडम तड़पते बुजुर्ग को अस्पताल भिजवाने या तुरंत प्राथमिक उपचार देने के बजाय मोबाइल से उनका फोटो खींचती और वीडियो बनाती नजर आईं. बाद में बुजुर्ग को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.
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क्या है पूरा मामला और क्यों तड़प रहे थे बुजुर्ग?
मृतक बुजुर्ग की पहचान श्योपुर के सब्जी मंडी इलाके के रहने वाले देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है. परिजनों के मुताबिक, देवेंद्र गोयल की दुकान को लेकर उनके ही कुछ करीबियों (कुंज बिहारी और उनकी पत्नी जूही) से लंबे समय से पुराना विवाद चल रहा था. इस दुकान के विवाद के कारण वे रात-दिन भयंकर मानसिक तनाव में रहते थे और उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आती थी. पीड़ित बुजुर्ग देवेंद्र गोयल अपनी इस फरियाद को लेकर पहले भी कई बार जिला प्रशासन और पुलिस को आवेदन दे चुके थे, लेकिन भ्रष्टाचार या बेरुखी के चलते सिस्टम ने उनकी एक न सुनी. थक-हारकर वे मंगलवार को सुबह भगवान की पूजा करने के बाद फिर से कलेक्ट्रेट में लगी जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे थे, जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे फर्श पर गिरकर तड़पने लगे.
तहसीलदार मैडम का अमानवीय चेहरा आया सामने
जब बुजुर्ग कलेक्ट्रेट के फर्श पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब वहां मौजूद तहसीलदार मैडम असंवेदनशील बनी रहीं. वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि मैडम जमीन पर बेसुध पड़े बुजुर्ग से सवाल-जवाब कर रही हैं और अपने मोबाइल से उनका फोटो ले रही हैं. वीडियो में वे यह कहती भी सुनाई दे रही हैं कि "ऐसा थोड़े होता है, ले जाओ इसका इलाज कराओ." इलाज के दौरान देवेंद्र गोयल की मौत की खबर फैलते ही पूरे श्योपुर शहर में बवाल मच गया.
आक्रोशित जनता का धरना-प्रदर्शन
बुजुर्ग की मौत से गुस्साए परिजनों और स्थानीय अग्रवाल समाज के लोगों ने शव को सड़क पर रखकर उग्र धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. मामले की गंभीरता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए श्योपुर कलेक्टर तुरंत मौके पर पहुंचे. कलेक्टर ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस पूरे अमानवीय घटनाक्रम की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं. इसके साथ ही आरोपी तहसीलदार को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटाने का ऐलान किया गया है और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के लिए कमिश्नर को प्रस्ताव भेजा गया है. प्रशासन ने पीड़ित परिवार को रेड क्रॉस से फौरी आर्थिक मदद और परिवार के एक बच्चे को सरकारी नौकरी देने का भी भरोसा दिलाया है. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की बेबसी और सिस्टम की बेरुखी किस कदर हावी है.
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